कौन हैं अंगोमचा अकोइजम: जेएनयू से हटाए गए प्रोफेसर पर क्या हैं आरोप, इनके खिलाफ सड़कों पर क्यों आई भाजपा?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा ने मामले में कांग्रेस को भी निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि पार्टी अकोइजम को बचाने की कोशिश कर रही है। भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ नारेबाजी की तथा पोस्टर लहराकर अपना विरोध जताया।
इस घटनाक्रम के बाद अंगोमचा बिमोल अकोइजम और कांग्रेस से उनके संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। मामला उनके खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों और दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के कारण भी चर्चा में है। इस प्रकरण में उनके शैक्षणिक जीवन, राजनीतिक पृष्ठभूमि और उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कौन हैं अंगोमचा बिमोल अकोइजम?:
अंगोमचा बिमोल अकोइजम शिक्षाविद् और राजनेता हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से मनोविज्ञान में पीएचडी की थी। वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विद्यालय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अकोइजम के पास अध्यापन और अनुसंधान का लगभग 16 वर्ष का अनुभव है। उनके शोध का क्षेत्र सामाजिक एवं राजनीतिक मनोविज्ञान तथा सांस्कृतिक अध्ययन रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े रहने के बाद उन्होंने राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई।
अकोइजम इनर मणिपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। अब उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद के कारण उनका नाम राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।
किस मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी?:
दी गई जानकारी के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और धारा 79 के तहत मामला दर्ज किए जाने का उल्लेख है।
ये धाराएं महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा या लज्जा को ठेस पहुंचाने से संबंधित आरोपों से जुड़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कम से कम 11 छात्राओं की ओर से आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, आरोपों की संख्या और उनकी प्रकृति से जुड़ी जानकारी को संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम रूप से समझा जा सकता है।
प्राथमिकी दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के समान नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही उनकी कानूनी स्थिति तय होगी।
भाजपा ने कांग्रेस को भी घेरा:
इस मामले को लेकर भाजपा ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पर भी निशाना साधा। भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं ने राहुल गांधी और अकोइजम के खिलाफ नारे लगाए तथा पोस्टर दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि कांग्रेस इस मामले में अकोइजम का बचाव कर रही है।
इस घटनाक्रम ने मामले को राजनीतिक रूप भी दे दिया है। एक ओर अकोइजम के खिलाफ लगाए गए आरोप और प्राथमिकी चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विषय भी सामने आया है।
मामले में आगे की स्थिति पर नजर:
अंगोमचा बिमोल अकोइजम से जुड़े इस प्रकरण में प्राथमिकी, लगाए गए आरोपों और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में उनके पक्ष में दिए गए किसी विस्तृत बयान का उल्लेख नहीं है। इसलिए आरोपों पर उनका रुख स्पष्ट करने के लिए उनके आधिकारिक बयान या संबंधित दस्तावेजों की प्रतीक्षा करना उचित होगा।
मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। तब तक आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
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