लखनऊ: प्रदेशभर के निकाय अध्यक्षों ने भरी हुंकार, अधिकारों की अनदेखी पर आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ (Lucknow) के गांधी भवन सभागार में स्थानीय निकाय अध्यक्ष एसोसिएशन की ओर से प्रदेशभर के नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत अध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई। इसमें नगर निकायों की समस्याओं, सरकार की ओर से कथित उपेक्षा, जिला प्रशासन के बढ़ते हस्तक्षेप और निकायों की स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में शामिल अध्यक्षों ने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। अध्यक्षों ने मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर भी नाराजगी जताई।
मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर नाराजगी:
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देशराज सिंह ने कहा कि नगर निकाय भी सरकार का अभिन्न अंग हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने से अध्यक्षों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से मुलाकात के लिए कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय नहीं दिया गया।
देशराज सिंह ने इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बताते हुए कहा कि नगर निकायों से जुड़ी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर के निकाय अध्यक्ष आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर उठे सवाल:
बैठक में एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश अध्यक्ष पंडित बृजेश दत्ता गौड़ ने नगर निकायों में जिला प्रशासन के बढ़ते हस्तक्षेप पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप निकायों की स्वायत्तता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसके साथ ही उन्होंने अधिशासी अधिकारियों की कथित मनमानी और नगर निकाय बोर्ड के प्रति उपेक्षात्मक रवैये पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना था कि नगर निकायों को अपने कार्यों के संचालन में उचित अधिकार और स्वायत्तता मिलनी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर जनहित से जुड़े काम प्रभावित न हों।
जनकल्याणकारी योजनाओं में निकायों की भूमिका अहम:
नगर पालिका परिषद मऊ के अध्यक्ष अरशद जमाल ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में नगर निकाय अध्यक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्थानीय स्तर पर योजनाओं को आगे बढ़ाने और जनता से जुड़े कार्यों को पूरा करने में निकायों की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को नगर निकाय अध्यक्षों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्परता दिखानी चाहिए। यदि निकायों से जुड़े मुद्दों पर समय रहते ध्यान दिया जाता है तो जनहित के कार्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। बैठक में भी इस बात पर जोर दिया गया कि अध्यक्षों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए।
74वें संविधान संशोधन को लागू करने की मांग:
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव गणेश रावत ने नगर निकायों से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए 74वें संविधान संशोधन को तत्काल लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर निकायों को उनके अधिकार और स्वायत्तता मिलना जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि सरकार मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।
बैठक में निकाय अध्यक्षों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि नगर निकायों की भूमिका और अधिकारों से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। अध्यक्षों का कहना था कि स्थानीय निकायों की समस्याओं का समाधान किए बिना उनकी कार्यप्रणाली से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करना मुश्किल होगा।
प्रदेशभर के अध्यक्षों ने बैठक में रखे विचार:
बैठक में विभिन्न जिलों और नगर निकायों से आए अध्यक्षों ने अपने विचार रखे। इनमें मोहम्मद रिजवान (पाली), वली मोहम्मद, सरिता सिंह (बस्ती), मोहम्मद अयाज खां (बेलहरा), अनिल सिंह उसांवा, प्रदेश महासचिव खुर्शीद मंसूरी (बिजनौर), नवाब हुसैन, अरविंद कुमार, रईस अहमद, सुखवीर, कुंवर मोहम्मद अली, चांद काली खान, मोहम्मद फैजल, राकेश जायसवाल, जे.पी. गुप्ता और नवरंग सिंह सहित अन्य अध्यक्ष शामिल रहे।
बैठक के दौरान नगर निकायों के सामने आ रही समस्याओं और उनकी स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। अध्यक्षों ने सरकार से अपेक्षा जताई कि उनकी बात सुनी जाए और मांगों पर उचित निर्णय लिया जाए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी:
बैठक में शामिल निकाय अध्यक्षों ने सरकार से उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने, नगर निकायों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने और जनप्रतिनिधियों की बात सुनने की मांग की। उन्होंने कहा कि निकायों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी जारी रहने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
अध्यक्षों की नाराजगी का मुख्य कारण मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलना, जिला प्रशासन के कथित बढ़ते हस्तक्षेप और निकायों की स्वायत्तता से जुड़े सवाल रहे। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर निकाय अध्यक्षों की नजर रहेगी।
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रिपोर्टर: संतोष कुमार