हॉल की सीटें हिलेंगी, बौछार पड़ेगी, हवा चलेगी:लखनऊ में देश का पहला 10-D थिएटर खुला, बच्चे बोले- लगा दूसरी दुनिया में पहुंच गए
लखनऊ (Lucknow) के अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान नगरी में 10-डी थिएटर की शुरुआत हो गई है। इस थिएटर में फिल्म देखने के दौरान दर्शकों को केवल पर्दे पर दृश्य ही नहीं दिखाई देंगे, बल्कि सीटों के हिलने, हवा के झोंकों और पानी की बौछार जैसे प्रभावों का अनुभव भी होगा। मंगलवार को उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने थिएटर का उद्घाटन किया। पहले शो में शामिल बच्चों ने इस अनुभव को रोमांचक बताया। उनका कहना था कि ऐसा महसूस हुआ, जैसे वे पर्दे पर दिखाई जा रही दुनिया के भीतर पहुंच गए हों। दावा किया गया कि यह देश का पहला 10-डी थिएटर है, जिसे स्वदेशी तकनीक से करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसमें एक साथ 25 दर्शकों के बैठने की क्षमता है।
सीटों के कंपन और पानी की बौछार का मिलेगा अनुभव:
आंचलिक विज्ञान नगरी के इस थिएटर में फिल्म देखने का अनुभव सामान्य पर्दे पर फिल्म देखने से अलग होगा। यहां त्रिआयामी दृश्यों के साथ कई तरह के विशेष प्रभावों को भी महसूस किया जा सकेगा। फिल्म में तेज रफ्तार से गुजरते वाहन दिखाई देने पर सीटें हिलेंगी, जबकि हवा के झोंकों और कंपन का एहसास भी दर्शकों को होगा।
इसी तरह, यदि फिल्म में जंगल या बारिश से जुड़ा दृश्य दिखाया जाता है, तो दर्शकों को पानी की बौछार महसूस हो सकती है। इन प्रभावों का उद्देश्य पर्दे पर दिखाई देने वाले दृश्यों को दर्शकों के लिए अधिक वास्तविक और जीवंत बनाना है। उद्घाटन के बाद पहले शो में पहुंचे बच्चों ने भी इस अनुभव को लेकर उत्साह जताया।
दिल्ली और लखनऊ की टीम ने विकसित की तकनीक:
इस स्वदेशी 10-डी थिएटर को राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र (National Science Centre), दिल्ली और आंचलिक विज्ञान केंद्र, लखनऊ की टीम ने मिलकर विकसित किया है। इसे करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य कम खर्च में ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिसका इस्तेमाल देश के अन्य शहरों में भी किया जा सके।
आंचलिक विज्ञान केंद्र के प्रमुख शतदल घोष के मुताबिक, राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र के निदेशक विजय शंकर शर्मा के नेतृत्व में अगले चरण में दिल्ली, कोलकाता, कुरुक्षेत्र और गुवाहाटी में भी इस तरह के थिएटर शुरू करने की योजना है। इससे विज्ञान से जुड़ी नई तकनीक को अधिक लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
रजनी तिवारी ने बताया आत्मनिर्भर भारत की मिसाल:
थिएटर का उद्घाटन करते हुए उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने इसे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की भावना का उदाहरण बताया। उन्होंने इस तकनीक को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों और तकनीकी कर्मचारियों को बधाई दी।
रजनी तिवारी ने कहा कि देश में ही नई तकनीकों का विकास होना बदलते भारत की पहचान है। जिन तकनीकों के बारे में पहले केवल कल्पना की जाती थी, अब उन्हें देश में तैयार कर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। उनके मुताबिक, शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा पैदा करना और उन्हें नए सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि 10-डी थिएटर के माध्यम से बच्चे विज्ञान और तकनीक को अधिक नजदीक से समझ सकेंगे। किसी चीज को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद बच्चों के मन में यह जानने की इच्छा पैदा होती है कि वह कैसे काम करती है और उसे किस तरह बनाया गया है। ऐसे सवाल ही नई सोच और नवाचार की शुरुआत करते हैं।
स्कूलों से बच्चों को विज्ञान नगरी लाने की अपील:
मंत्री ने शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से आंचलिक विज्ञान नगरी लेकर आएं और ऐसे शैक्षिक भ्रमण को पढ़ाई का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि किताबों से जानकारी हासिल करना जरूरी है, लेकिन चीजों को देखकर और अनुभव के माध्यम से सीखने का भी अपना महत्व है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के बच्चों तक विज्ञान और नई तकनीक की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया। रजनी तिवारी के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता को प्रदेश के विद्यार्थियों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से जोड़ा जा सकता है। इससे विज्ञान की शिक्षा को अधिक व्यापक बनाया जा सकेगा।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा को संस्कार, तकनीक और नवाचार से जोड़ना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने लखनऊ की पहचान को तहजीब के साथ विज्ञान और नवाचार के केंद्र के रूप में मजबूत होने की बात कही। बेटियों की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने बदलते भारत और महिलाओं के सशक्तीकरण का प्रतीक बताया। मंत्री ने स्वयं भी 10-डी थिएटर का अनुभव लेने की बात कही।
बच्चों ने बताया कैसा रहा पहला शो:
पहले शो में शामिल प्रियांशी यादव ने बताया कि थिएटर में उन्हें ऐसा महसूस हुआ, जैसे वे खुद उसी जगह पहुंच गई हों, जहां के दृश्य पर्दे पर दिखाए जा रहे थे। उन्होंने इमारतों, रोशनी और प्रकृति से जुड़े दृश्यों को काफी वास्तविक बताया।
सौम्या वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि थिएटर में ऐसा लगा, जैसे वे किसी दूसरी जगह पहुंच गई हों। उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने कई जगह इस तरह के शो देखे हैं, लेकिन यहां का अनुभव काफी अच्छा रहा।
अब्दुल अहद ने बताया कि शो के दौरान पानी की बौछार का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में डायनासोर और उल्कापिंड से जुड़ी जानकारी भी मिली। इसके साथ ही अवसादन और उल्कापिंडों से संबंधित विषयों को करीब से समझने का अवसर मिला।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पीजी कॉलेज की छात्रा खुशी ने बताया कि वे नए थिएटर को देखने विज्ञान केंद्र पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि वहां भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें कुछ देर इंतजार करने के लिए कहा गया। बच्चों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि थिएटर को लेकर उनमें उत्सुकता है।
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