भाजपा नेता Vijay Mishra ने की Gyanesh Kumar को पद्मश्री देने की मांग…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता विजय मिश्र ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा चुनाव आयोग के विरोध में विपक्ष की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह राजनीतिक हताशा के कारण देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। विजय मिश्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूचियों में दर्ज नामों की वास्तविक स्थिति सामने आई है। उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक आंदोलन के बजाय उपद्रव करार दिया।
चुनाव आयोग के कामकाज की सराहना:
विजय मिश्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में ऐसा ऐतिहासिक कार्य हुआ है, जिसे वह पद्मश्री और पद्मविभूषण जैसे सम्मान के योग्य मानते हैं। उनके अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाता सूचियों में दर्ज नामों की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले कई लोगों के नाम गांव, शहर और नौकरी वाले जिले की मतदाता सूचियों में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने की स्थिति थी। विजय मिश्र का दावा है कि पुनरीक्षण के दौरान ऐसे दोहराव वाले नामों के साथ-साथ कुछ अन्य संदिग्ध प्रविष्टियों को भी हटाया गया है। उन्होंने विदेशी नागरिकों और रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी नागरिकों के नामों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूचियों में कथित फर्जी प्रविष्टियों का मुद्दा उठाया। हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मतदान प्रतिशत बढ़ने की जताई उम्मीद:
पूर्व मंत्री ने कहा कि पहले समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), कांग्रेस (Congress) और भारतीय जनता पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ चुनाव आयोग भी मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रयास करता था। इसके बावजूद मतदान का आंकड़ा अक्सर 60 से 70 प्रतिशत के बीच रह जाता था।
विजय मिश्र के मुताबिक, मतदाता सूचियों में नामों के दोहराव के कारण वास्तविक मतदाताओं की संख्या को लेकर स्थिति प्रभावित होती थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची की स्थिति स्पष्ट होने से भविष्य में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उनका विश्वास है कि आने वाले समय में मतदान 90 से 95 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। यह उनका अनुमान है, न कि भविष्य के मतदान प्रतिशत का कोई सुनिश्चित आंकड़ा।
विपक्ष के प्रदर्शनों को बताया उपद्रव:
विजय मिश्र ने एसआईआर और चुनाव आयोग के विरोध में विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अशांति फैलाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अलग-अलग मुद्दों पर हुए आंदोलनों के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया है। विजय मिश्र ने किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को संसद और जंतर-मंतर जैसे मंचों पर अपनी बात रखने का अवसर मिलने के बावजूद उसने इसका उचित उपयोग नहीं किया।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विजय मिश्र ने उनके आचरण, व्यवहार और भाषा को लेकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियां कांग्रेस को कमजोर करने वाली हैं। उन्होंने संसद, आकाशवाणी और सर्वोच्च न्यायालय से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए विपक्ष के व्यवहार पर सवाल उठाए।
विजय मिश्र ने कहा कि कांग्रेस 90 से अधिक चुनाव हार चुकी है और उसकी राजनीतिक हताशा अब विरोध प्रदर्शनों में दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देखकर अराजकता का रास्ता अपना रहा है। ये सभी टिप्पणियां विजय मिश्र के राजनीतिक विचार और आरोप हैं।
प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था का दिया उदाहरण:
पूर्व मंत्री ने सरकारी कामकाज की प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी सरकारी फाइल पर क्लर्क से लेकर अनुभाग अधिकारी, संयुक्त सचिव और प्रमुख सचिव तक अलग-अलग राय दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाता है। उनके मुताबिक, अलग-अलग अधिकारियों की राय में अंतर होना अपने आप में पूरी व्यवस्था की विफलता का प्रमाण नहीं है।
उन्होंने मीडिया और न्यायपालिका का उदाहरण भी दिया। विजय मिश्र के अनुसार, संपादकीय प्रक्रिया या न्यायाधीशों की संयुक्त पीठ में अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन इससे पूरी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे प्रशासनिक और संस्थागत कामकाज की सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि मतभेदों को व्यवस्था के विरुद्ध अभियान का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
विपक्ष की राजनीति पर फिर उठाए सवाल:
विजय मिश्र ने अंत में कहा कि विपक्ष दिशाहीन हो गया है और अपनी राजनीतिक स्थिति कमजोर होने के कारण विरोध प्रदर्शन के जरिए माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे विरोध के पीछे विपक्ष की राजनीतिक हताशा है। उनके बयान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का समर्थन और विपक्ष की रणनीति की आलोचना प्रमुख रूप से सामने आई।
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