एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती: राहुल गांधी के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी, याचिका में क्या कहा?
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मतदाता सूची में सुधार के लिए अपनाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिका में चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। ओवैसी पहले भी एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाताओं पर लगाई जा रही अतिरिक्त शर्तों को लेकर अपनी आपत्ति जता चुके हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेता भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता आंकड़ों की जांच कराने की मांग की है।
ओवैसी ने एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल:
असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी याचिका के माध्यम से चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया को चुनौती दी है। वह इस प्रक्रिया के तरीके पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनकी मांग है कि एसआईआर को तत्काल रोका जाए और मतदाताओं पर लगाई गई अतिरिक्त शर्तों की समीक्षा की जाए।
ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को भी चुनौती देने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी छूट से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इस मामले में दाखिल याचिका के जरिए एसआईआर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को न्यायालय के सामने रखा गया है।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने भी दाखिल की याचिका:
ओवैसी से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi), राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कथित गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है।
विपक्षी नेताओं ने मतदाता आंकड़ों और सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच आवश्यक है। याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन से जुड़े तकनीकी तथा प्रशासनिक पहलुओं की पड़ताल कराने की मांग भी शामिल है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग:
विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति को एसआईआर प्रक्रिया के क्रियान्वयन की जांच करने की जिम्मेदारी देने की मांग की गई है। इसके साथ ही मतदाता सूची और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से संबंधित तकनीकी प्रणालियों की जांच कराने की बात भी कही गई है।
याचिका में मतदाता आंकड़ों और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने पर जोर दिया गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस तरह की जांच से प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों की पड़ताल की जा सकेगी। हालांकि, समिति गठित करने और जांच के संबंध में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को लेना होगा।
चुनाव आयोग के फैसले से जुड़े रिकॉर्ड मांगे:
विपक्षी याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से चुनाव आयोग की सामूहिक शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने पूछा है कि अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना इस तरह के अधिकारों का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया।
इसके साथ ही देशभर में एसआईआर लागू करने के फैसले से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसमें संबंधित फाइलें, बैठकों का विवरण, अधिकारियों की टिप्पणियां और दर्ज की गई आपत्तियां शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन रिकॉर्ड के माध्यम से यह स्पष्ट हो सके कि देशभर में एसआईआर शुरू करने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।
राहुल गांधी की याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख:
राहुल गांधी की याचिका में तर्क दिया गया है कि चुनाव आयोग को एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था के रूप में काम करना चाहिए। याचिका के अनुसार, मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा की शर्तों और कार्यकाल से संबंधित वर्ष 2023 के कानून के अनुरूप होने चाहिए।
याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और उसके अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने यह भी मांग की है कि एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम हटाने से संबंधित कार्यवाही की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
एसआईआर को लेकर कानूनी बहस तेज:
असदुद्दीन ओवैसी और विपक्ष के अन्य नेताओं की याचिकाओं के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस और तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
ओवैसी ने एसआईआर पर रोक लगाने की मांग के साथ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी आपत्ति जताई है। वहीं, विपक्षी याचिका में स्वतंत्र ऑडिट और सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग की गई है। इन मांगों पर आगे क्या निर्णय होगा, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा। फिलहाल, याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दे न्यायिक विचार के विषय हैं।
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