‘क्या न्याय मांगना अपराध है?’: अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर भड़के खरगे, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मोदी सरकार की कायरता और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा बताया। खरगे ने कहा कि न्याय की मांग कर रहे माता-पिता को हिरासत में लिया गया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कथित ‘वीआईपी’ को राज्यपाल पद से सम्मानित किया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता के दमन से जोड़ते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
खरगे ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल:
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को खो चुके माता-पिता न्याय की गुहार लगा रहे थे, लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया। खरगे के मुताबिक, ऐसे माता-पिता के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करने वाले परिवार के साथ ऐसा व्यवहार करना सरकार की ताकत का नहीं, बल्कि सवालों से बचने का संकेत है।
‘सत्ता का दमन ताकत नहीं, सवालों से भागने का प्रमाण’:
खरगे ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार सवालों का सामना करने के बजाय कार्रवाई के जरिए आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ संवेदनशीलता से पेश आने की जरूरत थी। उनके अनुसार, न्याय की मांग कर रहे परिवार को हिरासत में लिया जाना निंदनीय है।
उन्होंने भाजपा के एक कथित ‘वीआईपी’ को राज्यपाल पद दिए जाने का उल्लेख करते हुए सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। खरगे ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और न्याय की मांग कर रहे परिवार के प्रति व्यवहार पर सवाल उठाए।
अंकिता भंडारी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी:
अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे का बयान केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस के हमले के रूप में सामने आया है। उन्होंने अपने वक्तव्य में परिवार की पीड़ा और न्याय की मांग को प्रमुखता देते हुए सरकार की कार्रवाई को असंवेदनशील बताया।
खरगे के आरोपों पर आधारित इस बयान में केंद्र सरकार की आलोचना की गई है। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करने वाले माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सत्ता का इस्तेमाल सवालों से बचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
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