‘भारत के आंतरिक मामलों में दखल क्यों?’: अभिजीत दिपके ने मैरी मिलबेन को दिया जवाब, विदेशी फंडिंग पर छिड़ा विवाद
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन (Mary Millben) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) के बीच बुधवार को सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली। दोनों के बीच विवाद की वजह भारत में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे संगठन को कथित तौर पर विदेशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता रही। मिलबेन ने दावा किया कि संगठन को अमेरिका में मौजूद दानदाताओं से धन मिल रहा है। वहीं, दिपके ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों के हस्तक्षेप का विरोध किया। इस दौरान दोनों ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक-दूसरे के बयानों पर प्रतिक्रिया दी।
मिलबेन ने संगठन को मिलने वाली फंडिंग पर उठाए सवाल:
मैरी मिलबेन ने एक्स पर एक पोस्ट साझा कर कॉकरोच जनता पार्टी को कथित तौर पर अमेरिका में बैठे दानदाताओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत के युवाओं से अपील की कि वे आगे आकर अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाले संगठन की विचारधारा के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं।
मिलबेन ने अपने संदेश में भारतीय युवाओं से देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का आग्रह किया। उन्होंने संगठन की सोच को नुकसान पहुंचाने वाली बताते हुए उसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।
अभिजीत दिपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति:
मैरी मिलबेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने ही देश के नागरिकों के खिलाफ अमेरिकियों का समर्थन लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका पर भी आपत्ति जताई।
दिपके ने अपने जवाब में कहा कि भारत के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया है। उनके मुताबिक, भारत अपने मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है और देश के मामलों में बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं है। इस तरह दिपके ने मिलबेन के बयान को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।
वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन:
यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई, जब नई दिल्ली (New Delhi) में विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक विरोध के बीच मिलबेन और दिपके के बीच सोशल मीडिया पर हुई बहस ने भी ध्यान खींचा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संगठन को विदेशी धन मिलने के दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त विवरण नहीं दिया गया है।
मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन का किया जिक्र:
दिपके के सवालों का जवाब देते हुए मैरी मिलबेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री को पिछले 25 वर्षों से 1.5 अरब भारतीय नागरिकों का समर्थन हासिल है।
मिलबेन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के कार्यकाल और लगातार तीन कार्यकाल तक प्रधानमंत्री बने रहने का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2029 में भी लोग प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करेंगे। इस तरह उन्होंने दिपके के उस सवाल का जवाब दिया, जिसमें प्रधानमंत्री पर अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकी समर्थन लेने की बात कही गई थी।
दिपके को मिलबेन ने दी सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह:
मैरी मिलबेन ने अभिजीत दिपके को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने प्रयासों में सफल नहीं होंगे, क्योंकि अराजकता कभी जीत हासिल नहीं करती। उन्होंने दिपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों के लिए करने की अपील की।
मिलबेन ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर भारत की प्रगति के लिए सकारात्मक आवाज बनने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सही काम करने का साहस उनके अगले कदमों से साबित होगा। इस तरह दोनों के बीच शुरू हुई बहस में विदेशी फंडिंग, भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
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