मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत लिख जज ने पेन फेंका:लिखा- फांसी पर तब तक लटकाओ, जब तक मौत न हो; महाभारत का श्लोक पढ़ा
मेरठ (Meerut) के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाया। सजा का ऐलान होते ही अदालत कक्ष में मौजूद सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी और भाई राहुल भावुक हो गए। मां ने हाथ जोड़कर अदालत के प्रति आभार जताया और रोते हुए अपने आंसू पोंछे। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से अदालत में जुड़े मुस्कान और साहिल भी फैसला सुनकर रोने लगे।
अदालत में सजा सुनाए जाने से पहले अभियोजन पक्ष, बचाव पक्ष और सौरभ के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। अभियोजन और पीड़ित परिवार की ओर से दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की गई, जबकि बचाव पक्ष ने पारिवारिक परिस्थितियों और बच्चों के भविष्य का हवाला देते हुए कम सजा देने की अपील की।
अदालत में फैसले से पहले हुई दोनों पक्षों की बहस:
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा अदालत पहुंचे। उस समय कोर्ट रूम में सीमित संख्या में वकील मौजूद थे। जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुस्कान और साहिल को अदालत से जोड़ा गया। दोनों ने सिर झुकाकर सवालों के जवाब दिए। अदालत ने उनसे नाम, उम्र, शिक्षा, पता और परिवार से संबंधित जानकारी ली।
इसके बाद जिला जज ने मुस्कान से पूछा कि वह अपनी सजा के संबंध में कुछ कहना चाहती है या नहीं। मुस्कान ने सुबकते हुए अपनी बच्ची का ध्यान रखने की बात कही। जब साहिल से उसका पक्ष पूछा गया, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अदालत ने कहा कि सजा बाद में सुनाई जाएगी और दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हटा दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड देने की मांग की:
दोपहर करीब 11:30 बजे अदालत में सजा को लेकर बहस शुरू हुई। अभियोजन पक्ष के वकील डीजीसी केके चौबे ने करीब 35 पन्नों की दलीलें अदालत के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल ने कथित तौर पर सोची-समझी साजिश के तहत सौरभ राजपूत की हत्या की। अभियोजन पक्ष ने इस अपराध को गंभीर बताते हुए दोनों को मृत्युदंड देने की मांग की।
इसके बाद मुस्कान और साहिल की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता रेखा जैन ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दोनों के साथ छोटी बच्चियों का भविष्य जुड़ा है। मुस्कान के माता-पिता बुजुर्ग और बीमार हैं, जबकि साहिल अभी पढ़ाई करने वाला युवा है। बचाव पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि बच्चों के पालन-पोषण और आरोपियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम सजा दी जाए।
सौरभ के परिवार की ओर से भी फांसी की अपील:
सौरभ राजपूत के परिवार की ओर से अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उन्होंने मामले में सामने आए 22 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए दोनों आरोपियों को मृत्युदंड देने की मांग की। तीनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने भोजनावकाश के बाद फैसला सुनाने का आदेश दिया।
शाम को अदालत कक्ष में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सौरभ की मां रेनू देवी और भाई राहुल उर्फ बबलू भी वहां बैठे थे। शाम चार बजे के बाद मुस्कान और साहिल को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया। मुस्कान ने नीली कुर्ती और काला दुपट्टा पहना हुआ था। उसकी गोद में करीब 10 महीने की बच्ची थी, जबकि साहिल सफेद टी-शर्ट में दिखाई दिया।
फैसला सुनते ही रोने लगे मुस्कान और साहिल:
जिला जज के अदालत कक्ष में पहुंचने के बाद मुस्कान जोर-जोर से रोने लगी। उसे देखकर साहिल भी सिसकने लगा। अदालत ने दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया गया।
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत कक्ष में मौजूद सौरभ की मां और भाई भावुक हो गए। रेनू देवी ने हाथ जोड़कर अदालत का आभार जताया। फैसले के दौरान जिला जज ने महाभारत के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि अधर्म करने वाले को सजा देना भी धर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रजा सोती है, तब अदालत सजा देती है। खबर के मुताबिक, मृत्युदंड लिखने के लिए इस्तेमाल किया गया पेन भी जज ने तुरंत डस्टबिन में फेंक दिया।
सौरभ की मां बोलीं, बेटे को पूरा न्याय मिलने की उम्मीद:
फैसले के बाद रेनू देवी रोने लगीं। उन्होंने कहा कि अदालत ने उन्हें न्याय दिया है, लेकिन उन्हें पूरी संतुष्टि उस दिन मिलेगी, जब दोनों दोषियों को फांसी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही अदालत से मृत्युदंड की मांग कर रही थीं और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय में अपील करने की बात भी कही थी। हालांकि, उन्होंने मौजूदा फैसले पर संतोष जताया।
मुस्कान की बच्ची को लेकर रेनू देवी ने कहा कि उनके परिवार का बच्ची से संपर्क नहीं है और वे उसे अपने साथ रखने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार डीएनए जांच कराने की कार्रवाई नहीं करना चाहता।
सौरभ के भाई ने कहा, फैसले से मिला अहम न्याय:
सौरभ के भाई राहुल उर्फ बबलू ने कहा कि उनके भाई की हत्या जिस तरह की गई, उसके लिए मृत्युदंड से कम सजा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में अहम कदम बताया और कहा कि परिवार दोनों दोषियों को फांसी पर लटकते हुए देखना चाहता है।
मुस्कान की बच्ची के संबंध में राहुल ने कहा कि परिवार ने पहले डीएनए जांच के बारे में विचार किया था, लेकिन बाद में मुस्कान और साहिल की ओर से बच्ची को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद वे इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते।
मुस्कान के माता-पिता ने अदालत को पत्र दिया:
मामले की सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल के परिवार की ओर से कोई अदालत नहीं पहुंचा। मुस्कान के माता-पिता ने बुधवार सुबह पुलिस के माध्यम से अदालत को एक पत्र भेजा। इसमें उन्होंने लिखा कि मुस्कान को जो भी सजा मिले, उससे उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने उससे नहीं मिलने और उसकी छोटी बच्ची से भी कोई मतलब नहीं रखने की बात कही।
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