अमेठी: सांगीपुर में कवि सम्मेलन, कवियों की रचनाओं ने बांधा समां
तिलोई-अमेठी (Tiloi-Amethi) के सांगीपुर में नवरात्रि के अवसर पर 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कविता और गीतों से सजे इस साहित्यिक कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य एवं जिला पंचायत सदस्य राजेन्द्र बहादुर सिंह ने की, जबकि संचालन ओज कवि राज किशोर सिंह ‘किशोर’ ने किया। सम्मेलन में सामाजिक, धार्मिक और समसामयिक विषयों पर प्रस्तुत रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।
वाणी वंदना से हुआ कवि सम्मेलन का शुभारंभ:
कार्यक्रम की शुरुआत अमेठी (Amethi) से आए कवि चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ‘मंजुल’ की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं के जरिए साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया। सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य, ओज और भक्ति रस से जुड़ी प्रस्तुतियां सुनने को मिलीं। कवियों की अभिव्यक्ति और काव्य पाठ ने श्रोताओं को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।
ग्राम पंचायत चुनाव पर संदीप शरारती का व्यंग्य:
रायबरेली (Raebareli) से आए कवि संदीप शरारती ने अपनी रचना के माध्यम से ग्राम पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की मानसिकता पर व्यंग्य किया। उन्होंने ग्रामीण परिवेश में चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा और उसके पीछे की सोच को अपनी पंक्तियों में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा, “जो सौ पचास गांव मा कमाय लेत हैं, परधानी लड़ै केर ख्वाब देखत हैं वहौ।” उनकी इस रचना में ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर लोगों की महत्वाकांक्षाओं का चित्रण किया गया। प्रस्तुति ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया और सम्मेलन में व्यंग्य का रंग भर दिया।
झोलाछाप डॉक्टरों पर चन्द्र प्रकाश पाण्डेय की रचना:
अमेठी से आए कवि चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ‘मंजुल’ ने जगह-जगह मौजूद झोलाछाप डॉक्टरों पर व्यंग्यात्मक रचना प्रस्तुत की। उनकी कविता में इस विषय को व्यंग्य के माध्यम से उठाया गया। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा। कार्यक्रम में सामाजिक विषयों पर आधारित इस तरह की रचनाओं ने साहित्य के माध्यम से जनजीवन से जुड़े मुद्दों को सामने रखा।
भगवान राम पर फैयाज परवाना के मुक्तक:
प्रतापगढ़ (Pratapgarh) से आए कवि फैयाज परवाना ने भगवान राम पर आधारित मुक्तकों और छंदों का पाठ किया। उनकी रचनाओं में राम के वनगमन से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण चित्रण देखने को मिला। उन्होंने वनगमन के क्षणों को इन पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया, “जिन संग चला सिय तू हमरे नहीं कष्ट तुहूं का सहै का परी।”
उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। धार्मिक भावनाओं और काव्यात्मक अभिव्यक्ति से सजी इस रचना को सम्मेलन में उपस्थित लोगों ने सराहा।
आधुनिक बहू पर दीपेन्द्र तनहा की कविता:
रायबरेली से आए कवि दीपेन्द्र तनहा ने अपनी कविता के जरिए आधुनिक बहू के स्वभाव और उसके नए अंदाज का चित्रण किया। उन्होंने अपनी रचना में कहा, “सुन भैया सुन नई-नई दुलहिन कै नवा नवा गुन।” उनकी प्रस्तुति ने सम्मेलन में सामाजिक जीवन से जुड़े विषयों को काव्य के माध्यम से सामने रखा।
राज किशोर सिंह ‘किशोर’ के ओजस्वी छंदों पर बजीं तालियां:
कार्यक्रम का संचालन कर रहे अमेठी जनपद के प्रसिद्ध ओज कवि राज किशोर सिंह ‘किशोर’ ने अपने ओजस्वी छंदों और मुक्तकों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। उनकी रचनाओं में सामाजिक व्यवहार और घमंडी प्रवृत्ति के लोगों पर कटाक्ष देखने को मिला।
उन्होंने कहा, “मिलता आशीर्वाद नहीं तो पांव पुजाई न होगी। उर अन्तस में प्रेम नहीं उसकी प्रभुताई न होगी।” इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने प्रेम, विनम्रता और व्यवहार के महत्व को रेखांकित किया। श्रोताओं ने उनकी रचना की सराहना की और तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया।
शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष ने जताया आभार:
कवि सम्मेलन के समापन पर अमेठी के प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्यक्रम में शामिल हुए कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन में कृष्ण कुमार सिंह, राम आधार सिंह, संदीप कुमार सिंह, विजय सिंह, अम्बिका शरण खरे, रामेन्द्र सिंह, जितेन्द्र प्रताप सिंह, अंजनी कुमार सिंह, राम लखन सिंह, ऋतुराज सिंह, राज बहादुर सिंह, ददन सिंह, चन्दन मौर्य, अभिषेक सिंह, सुनील वर्मा, साहब शरण वर्मा, ज्योति खरे, शशि कुमारी सिंह, रन्जू सिंह और मीना सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह