लखनऊ में रिटायर आईएएस अधिकारी गिरफ्तार, पशुपालन भर्ती घोटाले में EOW का बड़ा ऐक्शन
लखनऊ में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। बुधवार सुबह टीम ने उन्हें गोमती नगर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई वर्ष 2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में की गई है। उस समय योगेश कुमार पशुधन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन और चयन में गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान योगेश कुमार के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
1198 पदों पर भर्ती में गड़बड़ी के आरोप:
वर्ष 2014 में प्रदेश के विभिन्न मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। लिखित परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई थी। इस प्रक्रिया के तहत 1005 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने के बाद नियुक्त भी किया गया था। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चयन में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने लगे थे।
उस समय विभाग के प्रमुख सचिव रहे योगेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किया था। सूत्रों के मुताबिक, मंडलायुक्त को मिलने वाले अधिकारों को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया गया था। जांच में यह बात भी सामने आई कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं यानी ओएमआर शीट की जांच एक ही स्थान पर कराई गई थी। आरोप है कि इस व्यवस्था से अंकों में हेरफेर की आशंका पैदा हुई। इन बिंदुओं को भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच का हिस्सा बनाया गया।
ईओडब्ल्यू ने साक्ष्य मिलने की बात कही:
आर्थिक अपराध शाखा के महानिदेशक जय नारायण सिंह ने बताया कि पशुधन भर्ती घोटाले की जांच में योगेश कुमार के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं। उनके अनुसार, जांच में दोषी पाए जाने के आधार पर सेवानिवृत्त अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस प्रकरण में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के साथ परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था की भूमिका की भी जांच की गई। जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका रही। हालांकि, आरोपों के संबंध में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
हाईकोर्ट में याचिकाओं के बाद शुरू हुई जांच:
भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने के बाद 34 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाओं में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के लिए 80 अंक और साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित थे। आरोप था कि साक्षात्कार में दिए गए अंकों के माध्यम से कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और भर्ती नियमों का उल्लंघन हुआ।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 17 दिसंबर 2017 को मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी गई। एसआईटी ने वर्ष 2018 में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। रिपोर्ट में कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन निदेशक चरण सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया।
मामले में आगे की कार्रवाई के तहत 29 जुलाई 2021 को 28 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अधिकारियों और परीक्षा कराने वाली संस्था की भूमिका की पड़ताल जारी रखी।
तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में:
भर्ती के समय पशुधन विकास मंत्री रहे राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। वर्ष 2016 में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद वह कई वर्षों तक राजनीतिक रूप से अलग-थलग रहे और वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।
राजकिशोर सिंह बस्ती से छह बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में तत्कालीन मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगी गई थी, लेकिन यह अनुमति नहीं मिली। आर्थिक अपराध शाखा को संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।
वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई से चर्चा में मामला:
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती का यह मामला वर्ष 2014 से जांच और कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजर रहा है। भर्ती में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद जांच शुरू हुई और बाद में प्राथमिकी दर्ज की गई। अब इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी हुई है।
योगेश कुमार की गिरफ्तारी को प्रदेश में वरिष्ठ नौकरशाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2007 में मायावती सरकार के दौरान मुख्य सचिव रह चुके अखंड प्रताप सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था। वर्ष 2023 में उनका निधन हो गया था।
पशुधन भर्ती मामले में अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
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