ईरान पर आज रात होने वाले हमले रद्द, ट्रम्प बोले- बातचीत अंतिम चरण में, ईरानी नेतृत्व से उच्च स्तर पर बनी सहमति
अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच बढ़े तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के एक बड़े फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। ट्रम्प ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई हमले और बमबारी को रद्द कर दिया है। इससे कुछ घंटे पहले ही उन्होंने ईरान पर कड़ी सैन्य कार्रवाई और उसके प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जे की चेतावनी दी थी। बाद में ट्रम्प ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत उच्च स्तर तक पहुंच गई है और उसे मंजूरी भी मिल चुकी है।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल (Truth Social) पर कहा कि ईरानी नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर तक बातचीत पहुंचने और विभिन्न पक्षों की सहमति मिलने के बाद उन्होंने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार अब वार्ता के अंतिम बिंदुओं पर काम किया जा रहा है।
भारत ने जहाजों पर हमलों पर जताई आपत्ति:
इसी बीच ओमान (Oman) के निकट भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए अमेरिकी हमलों को लेकर भारत (India) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा कि भारतीय क्रू वाले तीसरे जहाज एमटी जलवीर (MT Jalveer) पर भी हमला हुआ है। जहाज पर सवार सभी 20 भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं और उन्हें निकालने की प्रक्रिया जारी है।
भारत सरकार ने इस मामले में अमेरिकी राजदूत को तलब कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और जहाजों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की।
बीते 24 घंटों में सामने आए बड़े घटनाक्रम:
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कई महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई हैं। जॉर्डन (Jordan) की सेना ने दावा किया कि उसने ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं ईरान ने दावा किया कि उसने दक्षिणी क्षेत्र में अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन (MQ-9 Reaper Drone) को मार गिराया है, हालांकि अमेरिका की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी हमले के बाद आग लगने की भी खबर सामने आई। जहाज पर 24 भारतीयों सहित कुल 28 क्रू सदस्य सवार थे। रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कुछ अन्य लापता बताए गए हैं।
उधर रूस (Russia) ने अमेरिका और ईरान दोनों से सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। वहीं कतर (Qatar) ने तनाव कम करने के उद्देश्य से अपना प्रतिनिधिमंडल तेहरान (Tehran) भेजा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका का दावा:
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) अभी भी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला हुआ है। कमांड के अनुसार सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए गए हैं और प्रतिबंधों का उल्लंघन न करने वाले जहाज बिना किसी बाधा के इस मार्ग से गुजर सकते हैं।
अमेरिका का दावा है कि पिछले दो महीनों के दौरान सैकड़ों जहाज इस मार्ग से सुरक्षित होकर निकले हैं और समुद्री व्यापार सामान्य रूप से जारी है।
ईरान ने तेल और गैस आपूर्ति पर दी चेतावनी:
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया गया तो पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ईरानी सेना का कहना है कि या तो सभी देशों को तेल और गैस व्यापार की सुविधा मिलेगी या फिर किसी को भी नहीं मिलेगी।
यह बयान उस समय आया है जब ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका जल्द ही ईरान के तेल और गैस बाजार पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसके ऊर्जा केंद्रों पर हमला पूरे क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
पेंटागन में बढ़ाई गई सुरक्षा:
अमेरिका के रक्षा मुख्यालय पेंटागन (Pentagon) में खतरनाक पदार्थ मिलने की आशंका के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अधिकारियों के अनुसार भवन के भीतर वायु गुणवत्ता में गड़बड़ी पाए जाने के बाद एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
फायर ब्रिगेड और विशेष जांच दल मौके पर पहुंचकर जांच में जुटे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वायु गुणवत्ता प्रभावित होने का कारण क्या है।
अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर ईरान का आरोप:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने यूरोपीय संघ (European Union) की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास (Kaja Kallas) से बातचीत के दौरान अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया हमले संयुक्त राष्ट्र (United Nations) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून की भावना के विपरीत हैं।
अराघची ने कहा कि इन घटनाओं ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है और वैश्विक समुदाय की चुप्पी चिंता का विषय है। उनके अनुसार ऐसे मामलों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया आवश्यक है।
सीरिया में भी बढ़ी गतिविधियां:
सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइली सेना (Israeli Army) दक्षिणी सीरिया (Syria) के डेरा (Daraa) क्षेत्र के कई गांवों में पहुंची। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सैन्य वाहनों के साथ पहुंचे सैनिकों ने कई स्थानों पर जांच चौकियां स्थापित कीं और वाहनों की तलाशी ली।
इस घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण क्षेत्रीय हालात को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।
विशेषज्ञों ने दी अलग-अलग राय:
रिस्क विश्लेषक टोरब्योर्न सोल्टवेड्ट (Torbjorn Soltvedt) का कहना है कि अमेरिका और ईरान दोनों बेहतर समझौते की स्थिति में पहुंचने के लिए अपनी-अपनी रणनीति के तहत दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार दोनों पक्ष बातचीत जारी रखते हुए अपने प्रभाव को मजबूत करना चाहते हैं।
वहीं इटली (Italy) के प्रोफेसर लोरेन्जो कामेल (Lorenzo Kamel) का मानना है कि जब तक इजराइल (Israel) की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां बनी रहेंगी, तब तक अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण समझौता आसान नहीं होगा।
अमेरिकी पत्रकार किम्बरली हैल्केट (Kimberly Halkett) ने भी कहा कि ट्रम्प एक तरफ सख्त बयान देकर दबाव बना रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए हैं। उनके अनुसार यह दोहरी रणनीति ईरान को वार्ता की मेज पर बनाए रखने का प्रयास है।
क्षेत्रीय तनाव पर बनी हुई है दुनिया की नजर:
अमेरिका और ईरान के बीच जारी घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। सैन्य बयानबाजी, कूटनीतिक प्रयासों और समुद्री क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्षेत्रीय तनाव में कमी आती है या नहीं।
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