लखनऊ में स्थायी लोक अदालतों की कार्यप्रणाली मजबूत करने पर हुआ मंथन
लखनऊ में शनिवार को उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) की ओर से स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों और सदस्यों के लिए राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजधानी स्थित स्पंदन सभागार में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की सभी स्थायी लोक अदालतों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाना रहा। कार्यक्रम में जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के त्वरित, सुलभ और किफायती निस्तारण में स्थायी लोक अदालतों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सुलह-समझौते, आपसी संवाद और निष्पक्ष दृष्टिकोण के माध्यम से आम नागरिकों को न्याय उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने बताई स्थायी लोक अदालतों की अहमियत:
कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक माथुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) संस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालतें आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ी जन उपयोगी सेवाओं के विवादों को सुलझाने का महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम हैं।
न्यायमूर्ति माथुर ने कहा कि इन अदालतों के माध्यम से विवादों का समाधान केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें निरंतर संवाद, आपसी समझ और सौहार्दपूर्ण समाधान की भावना शामिल होनी चाहिए। उन्होंने अध्यक्षों और सदस्यों से अपील की कि अनिवार्य सुलह की प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता बनाए रखें। इससे विवाद से जुड़े पक्षकारों का न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
सुलह और संवाद से समाधान निकालना प्राथमिक उद्देश्य:
कार्यक्रम के प्रारंभ में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में स्थायी लोक अदालतों की भूमिका और उनके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन अदालतों का काम केवल नियमित न्यायालयों की तरह न्यायिक निर्णय देना नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर सहमति और सुलह के आधार पर विवादों का स्वीकार्य समाधान निकालना भी है।
डॉ. मनु कालिया ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के प्रावधानों के तहत स्थायी लोक अदालतों की व्यवस्था में सुलह की मानवीय भावना के साथ त्वरित न्याय निर्णयन की प्रक्रिया भी शामिल है। इसका उद्देश्य विवादों का ऐसा समाधान उपलब्ध कराना है, जिससे आम लोगों को अनावश्यक जटिलताओं का सामना न करना पड़े।

बिना कोर्ट फीस के मिलता है सुलभ न्याय:
अभिमुखीकरण कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्थायी लोक अदालतों को न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि यहां आम नागरिकों को बिना कोर्ट फीस और जटिल अदालती प्रक्रियाओं के त्वरित, सुलभ और किफायती न्याय प्राप्त करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के समाधान में इन अदालतों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
दिनभर चले तकनीकी सत्रों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों और सदस्यों ने अपने व्यवहारिक अनुभव साझा किए। इस दौरान अदालतों की मिश्रित प्रकृति यानी सुलह के माध्यम से समाधान और आवश्यकतानुसार न्यायिक निर्णय की व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
क्षेत्राधिकार और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा:
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में स्थायी लोक अदालतों के क्षेत्राधिकार से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही सुलह की कार्यवाही के दौरान अपनाई जाने वाली प्रभावी प्रक्रियाओं, उपयुक्त मामलों की पहचान और पक्षकारों के साथ सकारात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार किया गया।
प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर पर कामकाज के दौरान सामने आने वाली प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों को भी साझा किया। इन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के माध्यम से स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्षों और सदस्यों को उनकी जिम्मेदारियों, कार्यप्रणाली तथा विवादों के निस्तारण से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई।
न्यायिक अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन:
यह कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकान्त तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के संरक्षण में आयोजित किया गया। इसके साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा का मार्गदर्शन भी कार्यक्रम को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में हुई चर्चा का मुख्य उद्देश्य स्थायी लोक अदालतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना और जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का निष्पक्ष, सरल तथा प्रभावी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करना रहा।
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