यूपी: योगी ही चुनावों में भाजपा की तरफ से होंगे सुल्तान, पर्दे के पीछे से अमित शाह से संभालंगे रणनीति
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को तेज करते हुए प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के साथ चुनावी अभियान का बिगुल फूंक दिया है। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का स्पष्ट संदेश दिया। उनके संबोधन से संकेत मिला कि आगामी विधानसभा चुनाव में रणनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी वह स्वयं संभालेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज और प्रदेश में हुए विकास कार्यों की सराहना कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा आगामी चुनाव योगी के नेतृत्व में ही लड़ेगी। चुनावी रणनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्र सरकार के कामकाज को भी प्रमुखता दी जाएगी।
अमित शाह के संबोधन से साफ संकेत मिले कि भाजपा आगामी चुनाव में केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है। इसमें योगी सरकार की कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा कर पार्टी ने अपने हिंदुत्व से जुड़े एजेंडे को भी आगे बढ़ाने का संकेत दिया। शाह का संदेश रहा कि तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए सरकार की उपलब्धियों के साथ संगठन की कमजोरियों को भी दूर करना जरूरी है।
योगी बनाम अखिलेश के मुकाबले का संकेत:
गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के राजनीतिक दृष्टिकोण और कार्यकाल के अंतर को सामने रखें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को जनता को यह बताना चाहिए कि एक तरफ भाजपा है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य किया, जबकि दूसरी तरफ सपा है, जिसके शासनकाल में 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाई गई थी।
इस बयान के जरिए शाह ने आगामी विधानसभा चुनाव को योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक मुकाबले के रूप में प्रस्तुत करने की जमीन तैयार करने का प्रयास किया। पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इसी राजनीतिक संदेश के साथ जनता के बीच सक्रिय रहने का संकेत दिया गया।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर जोर:
अमित शाह ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए हर बूथ पर पकड़ मजबूत करने और जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को समझना और उनकी समस्याओं का समाधान करना भी संगठन की प्राथमिकता होनी चाहिए। पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनकी बात सुननी चाहिए।
शाह ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह उत्तर प्रदेश में बार-बार आएंगे और पार्टी पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के कामकाज की समीक्षा करेंगे। शिक्षक और स्नातक चुनाव के नतीजों के बाद संगठन को लेकर दी गई यह नसीहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व संगठन के भीतर मौजूद असंतोष और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को लेकर गंभीर है।
योगी के नेतृत्व पर शाह की मुहर:
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज की तारीफ करके अमित शाह ने प्रदेश में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने प्रदेश को अपराधियों और अराजकतावादियों से मुक्त कराने तथा कानून का शासन स्थापित करने के लिए योगी सरकार की सराहना की।
शाह के संबोधन को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भाजपा वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ने की तैयारी कर रही है। सरकार की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को पार्टी अपने चुनावी अभियान में प्रमुखता से रखेगी।
मोदी-योगी सरकार के विकास कार्यों पर रहेगा जोर:
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोड़ी को प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि दोनों के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश बना है। उन्होंने उद्योग-धंधों के विस्तार और विकास की नई संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
पार्टी की रणनीति इन उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की होगी। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए कामों को लेकर विपक्ष से सवाल पूछने के लिए भी तैयार रहने का संदेश दिया गया। इस तरह भाजपा विकास और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की तुलना को चुनावी चर्चा का हिस्सा बनाने की तैयारी में है।
उपेक्षित कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश:
गृह मंत्री ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से अधिक राष्ट्र, समाज और मानव कल्याण के लिए काम करना महत्वपूर्ण है। उनके इस संदेश को संगठन में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे कार्यकर्ताओं को भरोसा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की प्राथमिकताओं और संगठनात्मक रणनीति का खाका सामने रखा। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने, बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और योगी-मोदी के नेतृत्व को चुनावी अभियान का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।
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