जन महाभियोग कार्यक्रम: खरगे के आवास पर बनी मॉक संसद, मीरा कुमार बनीं स्पीकर, जानिए किस तरह संसद जैसा था नजारा
खरगे के आवास पर आयोजित मॉक संसद का नजारा पूरी तरह वास्तविक संसद जैसा दिखाई दिया। यहां बैठने की व्यवस्था से लेकर कार्यवाही के प्रसारण तक का इंतजाम संसद की तर्ज पर किया गया था। पहली पंक्ति में एक ओर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बैठे नजर आए, जबकि दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती मौजूद थीं। महबूबा मुफ्ती के पास तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी बैठे थे। वहीं, प्रियंका गांधी दूसरी पंक्ति में कपिल सिब्बल के साथ नजर आईं।
इस मॉक संसद की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। उन्हें मॉक पीठासीन अधिकारी बनाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत भी संसद की कार्यवाही की तरह हुई और सबसे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधन किया। इसके बाद अन्य वक्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। इस दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा करने वाले लोगों को भी अपनी परेशानी साझा करने के लिए मंच दिया गया।
मतदाता सूची से नाम कटने का दावा करने वालों ने रखी बात:
मॉक संसद में उन लोगों को भी बोलने का मौका दिया गया, जिनका दावा है कि मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। अध्यक्षता कर रहीं मीरा कुमार ने ऐसे लोगों की बात सुनी। इसी क्रम में सुशी अनीता जायसवाल ने भी अपनी परेशानी साझा की।
उन्होंने बताया कि वह कोलकाता से दिल्ली रहने आई थीं। वर्ष 2012 में दिल्ली में उनका पहचान पत्र बना था और इसके बाद से वह लगातार मतदान करती आ रही हैं। उन्होंने खुद को एकल मां बताते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर उन्हें किस देश का नागरिक माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह साबित करना चाहिए कि वह किस देश की नागरिक हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि उनके पहचान पत्र को मानने से इनकार करने का अधिकार किसने दिया।
पश्चिम बंगाल के इफ्तिखार अहमद ने भी मॉक संसद में अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि मतदाता सूची से उनका नाम भी काट दिया गया है। इस तरह कार्यक्रम में राजनीतिक नेताओं के साथ उन लोगों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जो मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा कर रहे हैं।
खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर आयोग का संचालन कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि देश में लोगों के मतदान के अधिकार पर खतरा पैदा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष रहकर काम करना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खरगे ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन किसी व्यक्ति के खिलाफ निजी लड़ाई नहीं है, बल्कि संवैधानिक संस्था की गरिमा बचाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिकों का भरोसा बनाए रखने की कोशिश है।
खरगे ने बताया कि सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था। हालांकि, उनके मुताबिक, सांसदों के नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं किया गया। उन्होंने चिंता जताई कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के नाम कंप्यूटर के माध्यम से मतदाता सूची से चुपचाप हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक का मतदान का अधिकार खत्म नहीं होना चाहिए।
मीरा कुमार ने महाभियोग प्रस्ताव की जानकारी दी:
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से पेश किया जाएगा। इसके बाद खरगे इस मामले पर बयान भी देंगे।
मीरा कुमार ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका के कई देश भारतीय लोकतंत्र के मॉडल को देखते हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था चुनावों की ताकत पर आधारित है और इस पूरी प्रक्रिया में मतदाता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उनके मुताबिक, यदि किसी एक मतदाता को भी मतदान करने से रोका जाता है तो यह लोकतंत्र की मूल भावना पर चोट है। किसी नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।
2023 के कानून को लेकर खरगे ने जताई आपत्ति:
मल्लिकार्जुन खरगे ने वर्ष 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए कथित तौर पर अपनाए गए तरीकों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों की खरीद-फरोख्त, राजनीतिक दलों को तोड़ने और सरकारें गिराने के बाद अब वोटों की चोरी की जा रही है। इस दौरान उन्होंने चुनावी बॉन्ड, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का भी उल्लेख किया।
खरगे ने दावा किया कि वोटों की चोरी के सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, उनकी सेवा शर्तों तथा कार्यकाल से जुड़े वर्ष 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित किए जाने के बाद यह कानून पारित किया गया था।
खरगे ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच मिल गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी इस स्तर का सुरक्षा कवच नहीं दिया गया है। मॉक संसद के माध्यम से विपक्ष ने मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
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