अयोध्या राम मंदिर में ₹7 करोड़ चढ़ावे की चोरी के आरोप पर गहराया विवाद: पूर्व लेखा प्रभारी ने चंपत राय पर लगाए गंभीर आरोप
अयोध्या (Ayodhya) स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। चढ़ावे में करोड़ों रुपये की कथित चोरी के दावों के बीच अब विभिन्न धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे मामले ने देशभर में चर्चा को जन्म दे दिया है, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय माना जा रहा है।
पूर्व लेखा प्रभारी ने लगाए गंभीर आरोप:
खुद को राम मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह (Mahipal Singh) ने दावा किया कि मंदिर में चोरी कोई नई बात नहीं थी, बल्कि यह नियमित रूप से होने वाली प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं कथित चोरी पकड़ी थी और इसकी जानकारी राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के महामंत्री चंपत राय (Champat Rai) तथा ट्रस्ट सदस्य गोपाल जी (Gopal Ji) को दी थी।
महिपाल सिंह के अनुसार शिकायत के अगले ही दिन उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की आठ महीने पुरानी फुटेज हटवा दी गई। उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में चंपत राय की मनमर्जी चलती है और विरोध करने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
शंकराचार्य की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा:
इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने एटा (Etah) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में शिला पूजन के समय से ही विभिन्न प्रकार के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले भी कई तरह के सवाल उठाए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अब जो आरोप सामने आ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और जनता के मन में मौजूद संदेह समाप्त हो सकें।
विनय कटियार ने जांच की आवश्यकता बताई:
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के वरिष्ठ नेता और बजरंग दल (Bajrang Dal) के संस्थापक विनय कटियार (Vinay Katiyar) भी लखनऊ (Lucknow) से अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उनका कहना था कि मामला करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है, इसलिए पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। जांच होने पर वास्तविक तथ्य सामने आ सकेंगे और लोगों के मन में किसी प्रकार की शंका नहीं रहेगी।
महंत परशुराम दास ने की निष्पक्ष जांच की मांग:
हनुमत किला (Hanumat Kila) पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास महाराज (Parshuram Das Maharaj) ने कहा कि यदि लगाए गए आरोप सही सिद्ध होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि रामभक्तों और आम जनता के मन में जो भ्रम पैदा हुआ है, वह दूर हो सके।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही सत्य सामने आएगा और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
पवन पांडेय और अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय (Pawan Pandey) ने 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से पांच करोड़ से लेकर साढ़े सात करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए मामले पर सवाल खड़े किए थे।
अखिलेश यादव ने कहा था कि इस विषय पर सरकार की चुप्पी सवाल पैदा करती है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट:
विवाद बढ़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. रजनीश सिंह (Dr. Rajneesh Singh) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की। इसके बाद 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी।
इसके साथ ही राम मंदिर भवन निर्माण समिति (Ram Mandir Construction Committee) के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र (Nripendra Mishra) ने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक कर चढ़ावे की राशि, उसके उपयोग और लेखा-जोखा से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
महिपाल सिंह ने रिकॉर्ड व्यवस्था पर उठाए सवाल:
महिपाल सिंह ने दावा किया कि मंदिर में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उनके सामने नहीं रखा जाता था। उन्होंने कहा कि यह जानकारी सीमित लोगों तक ही रहती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के वित्तीय लेन-देन और बैंक में राशि जमा कराने से जुड़े कई दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर तक नहीं कराए जाते थे, जबकि वे संबंधित कार्य से जुड़े हुए थे।
महंत कमल नयन दास ने भी रखी राय:
महंत कमल नयन दास (Kamal Nayan Das) ने कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले लोग भी पूरी तरह निष्पक्ष हों, यह आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि समाज के सामने सभी पक्षों की सच्चाई आनी चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
नेताओं के बयानों से बढ़ी राजनीतिक हलचल:
चढ़ावे के कथित विवाद को लेकर विभिन्न नेताओं की ओर से भी बयान सामने आए हैं। अखिलेश यादव ने सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने इन आरोपों को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा और प्रतिक्रिया दी।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh), समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) तथा पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya Pramod Krishnam) ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की।
जांच और पारदर्शिता पर टिकी निगाहें:
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद के बीच विभिन्न पक्षों की ओर से निष्पक्ष जांच, विशेष ऑडिट और पारदर्शिता की मांग लगातार उठ रही है। चूंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और संबंधित संस्थाओं की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही आरोपों और दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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