लखनऊ में वेतन असमानता पर बॉन्डेड डॉक्टरों का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में बॉन्डेड डॉक्टरों ने वेतन में असमानता के विरोध में प्रदर्शन किया। सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी करने वाले वर्ष 2018, 2019 और 2020 बैच के डॉक्टरों ने गांधी प्रतिमा पर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि समान डिग्री, समान बॉन्ड और समान सेवा की शर्तें होने के बावजूद उनके वेतन में अंतर किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से वेतन में समानता लागू करने और लंबे समय से लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग की।

डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि जब सभी डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और सेवा की शर्तें समान हैं, तो उन्हें मिलने वाले मानदेय में भी समानता होनी चाहिए। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने संबंधित मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

समान सेवा के बावजूद वेतन में अंतर का आरोप:

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद बॉन्ड सेवा के तहत नियुक्त डॉक्टरों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। डॉक्टरों का आरोप है कि एक जैसी शैक्षणिक योग्यता और सेवा की बाध्यता होने के बावजूद वेतन में अंतर उचित नहीं है।

डॉक्टरों ने मांग की कि वेतन से जुड़ी इस असमानता को दूर किया जाए और सभी पात्र डॉक्टरों के लिए समान व्यवस्था लागू की जाए। उनके मुताबिक, समान कार्य और समान सेवा की शर्तों के आधार पर मानदेय में एकरूपता होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर डॉक्टरों ने गांधी प्रतिमा पर विरोध प्रदर्शन किया।

दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा की बाध्यता:

डॉक्टरों के मुताबिक, बॉन्ड सेवा के अंतर्गत उन्हें दो वर्ष तक अनिवार्य सेवा करनी होती है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता भी लागू होती है। इस व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निर्धारित शर्तों के तहत सेवा देने के बावजूद उन्हें अपेक्षाकृत कम मानदेय मिल रहा है। उनके अनुसार, इस व्यवस्था में वेतन की असमानता दूर करना जरूरी है, ताकि समान सेवा करने वाले डॉक्टरों के बीच भुगतान को लेकर अंतर न रहे।

50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहा मानदेय:

डॉक्टरों के अनुसार, बॉन्ड सेवा के तहत काम करने वाले चिकित्सकों को करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने वेतन में समानता लागू करने के साथ-साथ लंबित एरियर का भुगतान करने की भी मांग उठाई।

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने, समान सेवा के लिए समान मानदेय सुनिश्चित करने और बकाया राशि का भुगतान करने से जुड़ी हैं। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर विचार कर उचित कदम उठाने की अपील की।

सरकार से मांगों पर विचार करने की अपील:

लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन के जरिए डॉक्टरों ने अपनी समस्याओं को सामने रखा। उनका कहना है कि समान डिग्री, समान बॉन्ड और समान सेवा की स्थिति में वेतन की व्यवस्था भी एक जैसी होनी चाहिए। प्रदर्शनकारी डॉक्टर वेतन में समानता लागू होने और लंबित एरियर का भुगतान किए जाने की मांग कर रहे हैं।

डॉक्टरों की ओर से उठाए गए मुद्दों का केंद्र बॉन्ड सेवा की शर्तों और मानदेय में कथित अंतर को दूर करना है। अब उनकी मांग है कि सरकार इस विषय पर विचार करे और वेतन संबंधी विसंगतियों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए।

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