October 13, 2026

यूपी में ‘I LOVE मोहम्मद’ विवाद: FIR के विरोध में मुस्लिम समुदाय सड़कों पर

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कानपुर में ‘I LOVE मोहम्मद’ का साइन बोर्ड लगाने को लेकर विवाद ने तेजी पकड़ ली है। 4 सितंबर को रावतपुर इलाके में बारावफात पर रोशनी के कार्यक्रम में यह बोर्ड लगाया गया था। अगले दिन हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया और मामला आमने-सामने आ गया। 5 सितंबर को इस घटना के बाद 12 नामजद और कुल 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इस FIR के खिलाफ मुस्लिम समुदाय ने यूपी के कई शहरों में सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया और इसकी रद्दीकरण की मांग की।


कानपुर में शुरुआती विवाद

कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात कार्यक्रम के दौरान ‘I LOVE मोहम्मद’ का बोर्ड लगाया गया। हिंदू संगठनों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह पहली बार ऐसा साइन बोर्ड लगाया गया है और इसे रोकना चाहिए। विरोध के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आए, पोस्टर-बैनर फाड़े गए और नारेबाजी हुई। पुलिस ने दो घंटे की मशक्कत के बाद हालात को संभाला।

10 सितंबर को रावतपुर थाने में दरोगा पंकज शर्मा की शिकायत पर 12 नामजद समेत 25 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। FIR के बाद खबर तेजी से फैल गई और पूरे राज्य में मुस्लिम समुदाय में नाराजगी फैली।


मुस्लिम नेताओं का बयान

कानपुर में शारदा नगर की मस्जिद में शहर के कई काजी और मुस्लिम नेताओं की बैठक हुई। ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने कहा कि RSS और BJP चाहते हैं कि मुस्लिम सड़कों पर उतरकर झगड़ा करें। उन्होंने अपील की कि लोग कानून का सहारा लेकर ही अपनी लड़ाई लड़ें और बेगुनाहों पर मुकदमे न बनाए जाएँ।

शहर काजी मौलाना मुश्ताक अहमद मुसायदी ने कहा कि ‘I LOVE मोहम्मद’ को झगड़े का मुद्दा बनाना गलत है और इससे माहौल बिगड़ता है।

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “मैं कहता हूं आई लव मोहम्मद। मेरी जिंदगी मोहम्मद के नाम है। संविधान ने मुझे अधिकार दिया है कि मैं अपने धर्म को मानूं।”

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा कि ‘I LOVE मोहम्मद’ लिखना जुर्म नहीं है। अगर ऐसा माना गया, तो इसकी हर सजा उन्हें मंजूर है।


अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन

FIR के बाद मुस्लिम समुदाय ने कई शहरों में प्रदर्शन किया:

  • उन्नाव: मनोहर नगर में मुस्लिमों ने जुलूस निकाला। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया और धक्का-मुक्की हुई। गंगाघाट कोतवाली के प्रभारी का वर्दी का स्टार नोच लिया गया। छह लोगों को हिरासत में लिया गया।
  • लखनऊ: विधानभवन के सामने मुस्लिम महिलाओं ने हाथों में ‘I LOVE MUHAMMAD’ की तख्ती लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने महिलाओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन ले गई और तीन घंटे बाद छोड़ा।
  • बरेली: जमात-ए-रजा-ए-मुस्तफा के निर्देश पर गलियों में पोस्टर लगाए गए। मोइन खान ने कहा कि यह केवल मोहब्बत और अकीदा का पैगाम है और किसी मजहब या समुदाय के खिलाफ नहीं है।
  • आगरा: फतेहपुर सीकरी की शाही जामा मस्जिद के बाहर नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग जुटे और FIR को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया।
  • कन्नौज और भदोही: नमाज के बाद जुलूस निकाले गए। युवा सिर तन से जुदा जैसे नारे लगाते हुए FIR वापस लेने की मांग के साथ बैनर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे।

धार्मिक भावना और कानून की अपील

उन्नाव के शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्रेम हर मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। इसे अपराध की श्रेणी में डालना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।

कानपुर के हाजी सलीस ने देश भर के मुसलमानों से कहा कि अपनी मोहब्बत का इज़हार काम और अमल से करें, सड़कों पर पत्थर और झगड़ा करने की बजाय कानून का सहारा लें।


विवाद का असर और सामुदायिक प्रतिक्रिया

FIR के बाद यूपी के मुस्लिम समुदाय में व्यापक विरोध देखने को मिला। बरेली, लखनऊ, आगरा, भदोही, कन्नौज और उन्नाव में प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर आवाज़ उठाई।

मुस्लिम नेताओं और समुदाय ने यह स्पष्ट किया कि पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करना गलत नहीं है। सभी प्रदर्शनकारी FIR रद्द कराने और किसी बेगुनाह को जेल भेजे जाने की स्थिति में आंदोलन करने पर जोर दे रहे हैं।


UP में यह विवाद अब धार्मिक स्वतंत्रता, समुदायिक पहचान और कानून के अधिकारों का बड़ा मुद्दा बन चुका है। मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया से साफ है कि वे अपने धार्मिक अधिकारों के लिए सड़कों पर आवाज़ उठाने के लिए तैयार हैं।


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