लगातार हो रही बारिश के बीच Pratapgarh (प्रतापगढ़) में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां करीब 100 साल पुराना मकान ढह जाने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। हादसा Nagar Kotwali (नगर कोतवाली) क्षेत्र के Mahuli (महुली) मोहल्ले में देर रात हुआ। घटना के समय परिवार के सात सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। इनमें माता-पिता, बेटा, बहू और दो मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि परिवार का एक सदस्य गंभीर रूप से घायल अवस्था में बच गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
रात दो बजे अचानक ढह गई छत:
बुधवार रात गर्मी और उमस के कारण परिवार के सभी सात सदस्य एयर कंडीशनर वाले कमरे में सो रहे थे। रात करीब दो बजे, जब सभी गहरी नींद में थे, तभी अचानक कमरे की छत भरभराकर गिर गई। मलबा सीधे पूरे परिवार के ऊपर आ गिरा। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने या मदद के लिए आवाज लगाने तक का मौका नहीं मिला और पूरा परिवार कई फीट ऊंचे मलबे के नीचे दब गया।
एक बेटा बचा, उसी ने मचाई मदद की गुहार:
हादसे के समय परिवार का बड़ा बेटा Aman Srivastava (अमन श्रीवास्तव) कमरे के किनारे सो रहा था। वह किसी तरह मलबे से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर निकलते ही उसने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। सूचना मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस व दमकल विभाग को जानकारी दी। इसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
दो घंटे चला राहत अभियान:
पुलिस और दमकल टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से करीब दो घंटे तक लगातार राहत कार्य चलाया। मलबे को हटाकर परिवार के सभी सदस्यों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने सभी छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार मलबे में दबने और दम घुटने से उनकी मौत घटनास्थल पर ही हो चुकी थी।
इन छह लोगों की हुई मौत:
इस हादसे में मकान मालिक Pramod Srivastava (प्रमोद श्रीवास्तव), उनकी पत्नी Rita (रीता), छोटा बेटा Nitin (नितिन), बड़ी बहू Madhuri (माधुरी) तथा उनके दो मासूम बेटे Madhav (माधव) और Advik (अद्विक) की जान चली गई। वहीं हादसे में घायल Aman Srivastava (अमन श्रीवास्तव) का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
पुश्तैनी मकान में रहता था परिवार:
जानकारी के अनुसार Pramod Srivastava (प्रमोद श्रीवास्तव) दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई Pawan (पवन) ने अलग मकान बनवा रखा है और Pratapgarh (प्रतापगढ़) कचहरी परिसर में चाय की दुकान चलाते हैं। प्रमोद अपने पुश्तैनी मकान में रहते थे और रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी पत्नी गृहिणी थीं। कुछ समय पहले दोनों भाइयों ने अपनी पैतृक जमीन करीब 75 लाख रुपये में बेची थी।
पहली मंजिल अधूरी रह गई थी:
करीब 1300 वर्गफीट में बने इस मकान में दो कमरे, रसोई, शौचालय और स्नानघर था तथा चारों ओर बाउंड्रीवाल बनी हुई थी। लगभग तीन वर्ष पहले मकान की पहली मंजिल की दीवारें तैयार कर दी गई थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उस पर लिंटर नहीं डल सका। परिवार आगे चलकर लिंटर डलवाने की तैयारी कर रहा था। प्रमोद श्रीवास्तव के छोटे बेटे नितिन की अभी शादी नहीं हुई थी।
बचे अमन ने बताई हादसे की पूरी कहानी:
हादसे में जीवित बचे Aman Srivastava (अमन श्रीवास्तव) ने बताया कि रात करीब साढ़े दस बजे पूरा परिवार खाना खाने के बाद एक ही कमरे में सो गया था। कमरे में वह स्वयं, उनकी पत्नी, दोनों बेटे, माता-पिता और छोटा भाई मौजूद थे। रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अचानक तेज आवाज हुई। जब उनकी आंख खुली तो पूरा कमरा मलबे में बदल चुका था और उनका शरीर भी मिट्टी के नीचे दबा हुआ था।
उन्होंने बताया कि किसी तरह बाहर निकलने के बाद उन्होंने देखा कि परिवार के बाकी सभी सदस्य मलबे में दबे हुए हैं। उन्होंने अकेले उन्हें निकालने का प्रयास किया, लेकिन मलबा बहुत अधिक होने के कारण सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने जोर-जोर से आवाज लगाकर आसपास के लोगों को बुलाया। स्थानीय लोगों के पहुंचने के बाद पुलिस और दमकल की टीम ने राहत कार्य शुरू किया। पुलिसकर्मियों ने लोहे की रॉड की मदद से खिड़की तोड़ी और अंदर पहुंचकर एक-एक कर सभी को बाहर निकाला।
पूरे इलाके में पसरा मातम:
एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से Mahuli (महुली) मोहल्ले में शोक का माहौल है। हादसे में परिवार लगभग पूरी तरह उजड़ गया और अब केवल घायल Aman Srivastava (अमन श्रीवास्तव) ही जीवित बचे हैं, जिनका अस्पताल में उपचार जारी है।
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