सरकार बोली-UPI पर लगने वाला शुल्क 4 हिस्सों में बंटेगा:ये पैसा खजाने में नहीं जाएगा; फिर दोहराया कि कस्टमर चार्ज नहीं देगा
2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लेकर सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच मतभेद सामने आए हैं। सरकार के सूत्रों के अनुसार यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और एमडीआर से मिलने वाली राशि सरकारी खजाने में भी नहीं जाएगी। यह रकम यूपीआई व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। वहीं, व्यापारी संगठनों ने इस प्रस्तावित शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का ऐलान किया है।
एमडीआर की रकम सरकार के खाते में नहीं जाएगी:
सरकार के सूत्रों के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाला 0.4 प्रतिशत एमडीआर ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि एमडीआर से प्राप्त होने वाली राशि सरकारी खजाने में नहीं जाएगी, बल्कि यूपीआई व्यवस्था में शामिल विभिन्न संस्थाओं के बीच उसका वितरण किया जाएगा।
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की ओर से एमडीआर को ग्राहकों पर लगाए जाने वाले कर के तौर पर पेश किए जाने के आरोपों को सरकार के सूत्रों ने खारिज किया है। सूत्रों के अनुसार एमडीआर न तो कर है, न उपकर और न ही अधिभार।
एमडीआर की रकम इस तरह होगी वितरित:
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार कुल एमडीआर में से 40 प्रतिशत रकम ग्राहकों के बैंकों को दी जाएगी। इसके अलावा 30 प्रतिशत हिस्सा भुगतान गेटवे, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप और शेष 10 प्रतिशत रकम यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।
इस व्यवस्था में शुल्क की राशि अलग-अलग संस्थाओं के बीच बांटने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, व्यापारियों की ओर से इस प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी चिंताएं जताई जा रही हैं।
2 अक्टूबर को व्यापारी मनाएंगे ‘नो यूपीआई डे’:
प्रस्तावित नए यूपीआई नियम के विरोध में देशभर के व्यापारी और दुकानदार 2 अक्टूबर को यूपीआई के जरिए भुगतान नहीं लेने का ऐलान कर चुके हैं। व्यापारी संगठनों ने इस दिन ‘नो यूपीआई डे’ के रूप में विरोध जताने की बात कही है।
विरोध के दौरान दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल भुगतान उपकरणों को काले कपड़े से ढकने की योजना बताई गई है। व्यापारियों की मांग है कि 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे प्रस्तावित शुल्क को वापस लिया जाए।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे के अनुसार यह आंदोलन केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। उनके मुताबिक देशभर के 500 से अधिक प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें शामिल होंगे।
व्यापारी संगठनों ने शुल्क पर उठाए सवाल:
व्यापारी संगठनों का कहना है कि खुदरा व्यापारी और वितरक कम लाभांश पर कारोबार करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है। उनका तर्क है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य लेनदेन की प्रक्रिया को आसान बनाना होना चाहिए, न कि व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना।
व्यापारियों के अनुसार यूपीआई के विस्तार से नकदी के इस्तेमाल में कमी आई है और वे डिजिटल लेनदेन की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाना उचित नहीं है। संगठनों ने यह भी कहा है कि यदि सरकार ने फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए अलग व्यवस्था:
प्रस्तावित नियमों के अनुसार महीने में यूपीआई के जरिए एक लाख रुपये से अधिक की कमाई करने वाले व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर और जीएसटी देना होगा। वहीं, जिन छोटे व्यापारियों की महीने में यूपीआई से कुल कमाई एक लाख रुपये तक है, उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह राहत 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर भी लागू बताई गई है।
यदि कोई छोटा दुकानदार लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का यूपीआई संग्रह करता है, तो बैंक उसे स्वतः बड़े व्यापारी की श्रेणी में डाल देंगे। इसके बाद उस पर प्रस्तावित शुल्क लागू होगा।
2,000 रुपये तक के भुगतान पर शुल्क नहीं:
प्रस्तावित व्यवस्था में बड़े व्यापारियों को भी 2,000 रुपये तक के छोटे भुगतान पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर व्यापारी से अधिकतम 300 रुपये और जीएसटी शुल्क लिए जाने की सीमा बताई गई है।
2,000 रुपये की सीमा पूरे दिन के कुल कारोबार के आधार पर नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक अलग-अलग भुगतान पर लागू होगी। यानी शुल्क का निर्धारण हर एक लेनदेन की राशि को देखकर किया जाएगा।
कुछ क्षेत्रों के लिए पांच रुपये की तय फीस:
पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल भुगतान, दूरसंचार, बीमा और शिक्षा से जुड़े व्यापारियों के लिए अलग व्यवस्था बताई गई है। इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.40 प्रतिशत शुल्क के बजाय पांच रुपये की तय फीस लेने का प्रावधान बताया गया है।
वहीं, व्यापारियों के सामने उपलब्ध जानकारी में यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर को क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े शुल्क की तुलना में कम बताया गया है। क्रेडिट कार्ड पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.90 प्रतिशत तक शुल्क का उल्लेख किया गया है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या है:
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है जो किसी व्यापारी या दुकानदार द्वारा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल भुगतान सुविधा का इस्तेमाल करने पर बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाता है। इसमें पॉइंट ऑफ सेल मशीन या भुगतान गेटवे जैसी सेवाओं का इस्तेमाल शामिल होता है।
एमडीआर से मिलने वाला शुल्क डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे और लेनदेन नेटवर्क को संचालित करने की लागत से जुड़ा होता है। दी गई जानकारी के अनुसार यह शुल्क व्यापारी से लिया जाता है, ग्राहक से नहीं।
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