चार महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी है। पहलवानों ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर करते हुए आरोप लगाया है कि फैसले में उपलब्ध साक्ष्यों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया। उनका कहना है कि आदेश अनुमान और अटकलों पर आधारित है तथा मामले में स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
निचली अदालत के फैसले को बताया कानूनन टिकाऊ नहीं:
महिला पहलवानों ने अपनी अपील में कहा है कि निचली अदालत का फैसला कानून की कसौटी पर टिकाऊ नहीं है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिलाओं के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़ धारणाओं को आधार बनाया गया। पहलवानों ने अदालत से अपील पर विचार करने और निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करने की मांग की है।
अपील में यह भी कहा गया है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र रूप से मूल्यांकन करने के बजाय कुछ हिस्सों को चुनकर देखा गया। महिला पहलवानों ने अदालत के समक्ष अपने पक्ष को इसी आधार पर रखा है।
26 सितंबर को सुनवाई की संभावना:
इस अपील पर विशेष न्यायाधीश (सांसद-विधायक मामलों) दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार, 26 सितंबर को सुनवाई होने की संभावना है। मामला राउज एवेन्यू अदालत परिसर से जुड़ा है। चारों महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को भी चुनौती दी है।
3 अगस्त को दोनों आरोपियों को किया गया था बरी:
राउज एवेन्यू अदालत की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया था और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।
अब चार महिला पहलवानों की ओर से दायर अपील के बाद यह मामला एक बार फिर अदालत के समक्ष पहुंच गया है। अपील में निचली अदालत के फैसले और उसमें साक्ष्यों के आकलन को चुनौती दी गई है।
2023 में जंतर-मंतर से शुरू हुआ था विरोध:
यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सामने आया था, जब करीब 30 पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना दिया था। इनमें विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया भी शामिल थे। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद खेल मंत्रालय की ओर से एक समिति गठित की गई थी।
21 अप्रैल 2023 को नाबालिग समेत सात महिला पहलवानों ने दिल्ली पुलिस में यौन उत्पीड़न की शिकायत दी थी। इसके बाद पहलवानों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया। 4 मई 2023 को उच्चतम न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई और महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पहलवानों ने मामले को लेकर जुलूस निकाला था। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। इसके दो दिन बाद 30 मई को पहलवान अपने पदक बहाने हरिद्वार पहुंचे थे, लेकिन अधिकारियों के समझाने के बाद उन्होंने अपना फैसला टाल दिया। 7 जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री और पहलवानों के बीच बैठक हुई थी।
आरोप पत्र और पॉक्सो मामले में आया बदलाव:
15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसी दौरान नाबालिग पहलवान और उसके पिता ने अपने बयान बदल दिए थे। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो मामले में समापन रिपोर्ट दाखिल की थी। जुलाई 2023 में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को अस्थायी जमानत दी थी।
मई 2024 में राउज एवेन्यू अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने और आपराधिक धमकी समेत आरोप तय किए थे। उन्होंने इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया था। वर्ष 2025 में दोनों पक्षों की दलीलें चलीं। पॉक्सो मामले में दिल्ली पुलिस की समापन रिपोर्ट अदालत ने स्वीकार कर ली और मामला औपचारिक रूप से बंद हो गया। हालांकि, अन्य महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ी कार्यवाही जारी रही और अदालत ने गवाहों तथा पहलवानों के बयान दर्ज किए।
अब सत्र अदालत में फैसले को चुनौती:
निचली अदालत से बरी किए जाने के बाद अब चार महिला पहलवानों ने सत्र अदालत का रुख किया है। उनकी अपील में निचली अदालत के फैसले की कानूनी वैधता, साक्ष्यों के आकलन और फैसले में अपनाए गए तर्कों को चुनौती दी गई है। अब अदालत इस अपील पर सुनवाई के दौरान महिला पहलवानों की ओर से रखे गए तर्कों और निचली अदालत के फैसले को देखेगी।
कानून के अनुरूप खबर:
इस खबर में अदालत में लगाए गए आरोपों और अपील में किए गए दावों को आरोप एवं पक्षकारों के तर्क के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के तथ्य को स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। अपील लंबित होने के कारण किसी पक्ष के आरोप या दावे को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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