दिल्ली-IIT में मोदी बोले- सिर्फ सवाल मत पूछिए,समाधान भी खोजें:अगले 35 साल आप जो करेंगे, वह विकसित भारत का आधार होगा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) के 57वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि छात्र यहां से केवल डिग्री लेकर नहीं, बल्कि सपने लेकर निकल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से लगातार सीखते रहने, समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान तलाशने की सीख दी। उन्होंने कहा कि अगले 35 वर्षों में छात्र जो काम करेंगे, वही विकसित भारत की दिशा और जरूरतों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की और मेडल पहनाए। कार्यक्रम में 3,000 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें पीएचडी कर रहे 587 विद्यार्थी भी शामिल रहे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित ‘परम प्रज्ञा’ नामक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उच्च क्षमता वाले सुपरकंप्यूटर का दूरस्थ माध्यम से उद्घाटन भी किया।

छात्रों के सपनों का किया जिक्र:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यार्थियों के भविष्य के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर छात्र के मन में आने वाले कल को लेकर कुछ न कुछ सपने होंगे। कोई पहली नौकरी और वेतन का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई अपना उद्यम शुरू करने की योजना बना रहा होगा। कुछ विद्यार्थी नई प्रतियोगिताओं की तैयारी करने के बारे में सोच रहे होंगे। उन्होंने कहा कि सभी के अपने-अपने सपने हैं।

प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यहां से निकलने वाला हर विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर कुछ न कुछ सोच रहा है।

तेजी से बदल रही दुनिया पर दी सीख:

प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी ऐसे संस्थान से निकल रहे हैं, जब दुनिया तेजी से बदल रही है। शिक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव हो रहा है तथा प्रौद्योगिकी की गति भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले 20 से 30 वर्षों में दुनिया किस तरह की होगी, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जब भी बदलाव आता है, उसके साथ चुनौतियां और अवसर दोनों आते हैं। उद्योग और पेशे के स्वरूप में बदलाव हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति लगातार सीखता रहेगा और नई चुनौतियों के समाधान खोजेगा, वही आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों ने आईआईटी में भी इसी तरह सीखने की क्षमता हासिल की है और उनकी डिग्री इसका प्रमाण है।

आईआईटी के बाहर जीवन को बताया अलग:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यार्थियों को कैंपस के बाद के जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी के परिसर में एक निर्धारित पाठ्यक्रम होता है, लेकिन वास्तविक जीवन में बहुत कुछ पाठ्यक्रम से बाहर होता है।

उन्होंने कहा कि असल जिंदगी में यह पहले से तय नहीं होता कि कौन-सी परीक्षा सामने आएगी या कौन-सा पाठ्यक्रम पढ़ना होगा। वास्तविक जीवन में कई बार व्यक्ति को खुद यह पहचानना पड़ता है कि असली सवाल क्या है और उसका समाधान कैसे खोजा जाए।

अगले 35 साल को लेकर कही बड़ी बात:

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अपनी चुनौतियां और जिम्मेदारियां होती हैं। उन्होंने देश की आजादी के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की पीढ़ी के सामने देश को स्वतंत्र कराने का लक्ष्य था और इसके लिए लंबे संघर्ष के साथ त्याग और बलिदान किया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के सामने चुनौतियां और जिम्मेदारियां अलग हैं। अगले 35 वर्षों में विद्यार्थी जो काम करेंगे, उससे यह तय होगा कि देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी और देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

दूसरों से तुलना नहीं करने की सलाह:

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को अपने करियर की तुलना दूसरों से नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते समय कई तरह की रुकावटें आती हैं। इस दौरान यह चर्चा भी होती है कि किसे कितना वेतन मिला, कौन किस शहर या देश में गया और किसने अपना उद्यम शुरू किया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की दौड़ किसी दूसरे व्यक्ति से नहीं, बल्कि खुद से है। इसलिए हर दिन खुद से बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी सलाह दी।

‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन:

दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का दूरस्थ माध्यम से उद्घाटन किया। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उच्च क्षमता वाला सुपरकंप्यूटर है।

‘परम प्रज्ञा’ का उद्देश्य तेज गति से जटिल गणनाएं करना और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा विज्ञान, उन्नत कंप्यूटिंग और अनुसंधान के क्षेत्र में मदद मिलने की जानकारी दी गई।

देश में 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित:

दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत भारत में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं और सभी चालू हैं। इन्हें देश के प्रमुख आईआईटी, भारतीय विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सी-डैक, आईआईएसईआर और अन्य शोध संस्थानों में स्थापित किया गया है।

इनमें पुणे का परम सिद्धि, बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान का परम प्रवेग, आईआईटी खड़गपुर का परम शक्ति, आईआईटी कानपुर का परम संगणक, आईआईटी हैदराबाद का परम सेवा, नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में स्थापित परम रुद्र, पुणे का परम ब्रह्मा, बेंगलुरु का परम युक्ति और वाराणसी स्थित आईआईटी-बीएचयू का परम शिवाय शामिल हैं।

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