अतीक का बेटा अली बोला- अब भाई भी छोड़ गया:झांसी जेल में 2 रातों से नहीं सोया; खाना नहीं खाया
माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत के बाद झांसी जेल में बंद उसके बड़े भाई अली अहमद सदमे में हैं। अबान की मौत की खबर सुनने के बाद अली फूट-फूटकर रोने लगा और कहा, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया।’ इसके बाद वह पूरी रात बेचैन रहा और सामान्य दिनों की तरह अपनी दिनचर्या में शामिल नहीं हुआ। अबान की मौत से पहले उसके द्वारा एक दरोगा से फोन पर कही गई बात भी सामने आई है। उसने कहा था, ‘मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई…।’ इसके कुछ ही समय बाद हादसे में उसकी मौत हो गई।
भाई से मिलने झांसी जा रहा था अबान:
अबान गुरुवार को झांसी जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मिलने के लिए जा रहा था। रास्ते में हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में उसकी कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य दोस्त घायल हो गए।
अबान की मौत की सूचना जब झांसी जेल में बंद अली को मिली तो वह बेहद भावुक हो गया। बताया गया कि उसने भाई की मौत पर रोते हुए कहा कि अब उसका भाई भी उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद वह काफी देर तक सदमे में रहा।
पूरी रात परेशान रहा अली:
अबान की मौत की खबर के बाद अली पूरी रात करवटें बदलता रहा और रोता रहा। सामान्य दिनों में वह सुबह व्यायाम करता था और कुछ लोगों से बातचीत भी करता था, लेकिन भाई की मौत के सदमे में वह अपनी कोठरी से बाहर नहीं निकला।
जेल सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए हर घंटे पहुंचने वाले जेल अधिकारियों से अली बार-बार हादसे के बारे में पूछता रहा। वह अबान की मौत से जुड़ी जानकारी जानने का प्रयास करता रहा।
शुक्रवार सुबह अली ने केवल हल्का नाश्ता किया। इसके बाद वह खाना खाने के लिए भी बाहर नहीं निकला। भाई की मौत का सदमा उसके व्यवहार और दिनचर्या में साफ नजर आया।
हर महीने तीन-चार बार मिलने आता था अबान:
अली और अबान के बीच भाई का करीबी रिश्ता बताया गया है। जानकारी के अनुसार, अबान अपने बड़े भाई अली से मिलने के लिए लगभग हर महीने तीन से चार बार झांसी जेल आता था। इन मुलाकातों के दौरान जेल की स्थानीय खुफिया इकाई और पुलिसकर्मी भी मौजूद रहते थे।
बताया गया कि मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक-दूसरे को देखते ही गले लग जाते थे। सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों कुछ समय साथ रहते थे। अबान अपनी मुलाकातों के सिलसिले में कई बार बस स्टैंड के पास स्थित एक होटल में भी रुकता था।
अबान अपने बड़े भाई के लिए किताबें और उपन्यास भी लेकर आता था। गुरुवार को हादसे के बाद कार से दो किताबें बरामद होने की जानकारी दी गई है। इनमें ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ और ‘द इडियट’ नाम की किताबें शामिल थीं।
जनाजे में शामिल होने के लिए मांगी पैरोल:
अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली अहमद और लखनऊ जेल में बंद उमर के परिवार की ओर से उच्च न्यायालय में पैरोल की अर्जी दाखिल की गई थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अली और उमर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़े।
दोनों ने अदालत से अपने भाई के जनाजे में शामिल होने की अनुमति मांगी। उन्होंने अदालत को भरोसा दिया कि वे इस दौरान मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट नहीं करने, किसी सभा को संबोधित नहीं करने और किसी अन्य कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने की बात भी कही।
अदालत ने तय की मुलाकात की शर्तें:
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि अली और उमर को सीधे जेल से कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाए। वहां उन्हें अपने छोटे भाई अहजम और बुआ परवीन कुरैशी से एक घंटे तक मिलने की अनुमति दी गई है।
अदालत के आदेश के मुताबिक यह मुलाकात पुलिस की निगरानी में होगी। निर्धारित समय पूरा होने के बाद दोनों को वापस जेल भेजा जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को दोनों की सुरक्षा तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
अली को प्रयागराज ले जाने की तैयारी:
अतीक अहमद की बहन परवीन कुरैशी की ओर से उमर और अली की पैरोल के लिए उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल की गई थी। उनके अधिवक्ता मोहम्मद सफदर अली काजमी ने अदालत में परिवार की ओर से पक्ष रखा।
जस्टिस अजय भनोट और डीसी सामंत की पीठ ने पैरोल को लेकर आदेश जारी किया। इसके बाद झांसी जेल प्रशासन ने अली को पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज ले जाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। जेल प्रशासन की ओर से पुलिस गार्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
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