गाज़ीपुर में बयान! पेपर लीक पर फंस गए ओपी राजभर?
गाजीपुर (Ghazipur) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय परीक्षा के प्रश्नपत्र बिक जाते थे और खेतों में पर्चे तक मिलते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा कि उन्होंने अपनी ही पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के विधायक बेदीराम (Bedi Ram) का जिक्र क्यों नहीं किया, जिनका नाम वर्षों पुराने रेलवे ग्रुप-डी पेपर लीक मामले में सामने आ चुका है और जिनके खिलाफ मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है।
पुराने मामले ने फिर पकड़ी सुर्खियां:
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NEET पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ‘लोक परीक्षा अधिनियम 2024’ लागू कर चुकी है। इस कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने तथा मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का प्रावधान किया गया है। इसी बीच पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) ने वर्ष 2006 के रेलवे ग्रुप-डी पेपर लीक मामले को फिर से सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया। इस मामले में भाजपा (BJP) के सहयोगी दलों के दो विधायकों, बेदीराम और निषाद पार्टी (NISHAD Party) के विधायक विपुल दुबे (Vipul Dubey), समेत कुल 22 आरोपी हैं। मामला विशेष MP-MLA कोर्ट (MP-MLA Court) में विचाराधीन है और सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ आरोपियों का इस दौरान निधन भी हो चुका है।
2006 रेलवे ग्रुप-डी पेपर लीक मामला क्या था?:
फरवरी 2006 में रेलवे (Railway) की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा आयोजित होनी थी। परीक्षा से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश STF (UP STF) ने दावा किया कि प्रश्नपत्र लीक हो चुका है। छापेमारी के दौरान प्रश्नपत्रों की प्रतियां बरामद किए जाने के बाद रेलवे को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें बेदीराम और विपुल दुबे के नाम प्रमुख रूप से सामने आए। दोनों पर कथित रूप से पेपर लीक गिरोह का हिस्सा होने और साजिश रचने के आरोप लगाए गए। मामले में लखनऊ (Lucknow) के कृष्णा नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
गैंगस्टर एक्ट के तहत भी हुई कार्रवाई:
जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट (UP Gangsters Act) के तहत भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। जुलाई 2024 में विशेष MP-MLA कोर्ट ने बेदीराम, विपुल दुबे और अन्य आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए। इसी दौरान अदालत में अनुपस्थित रहने पर दोनों विधायकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था। बाद में दोनों ने अदालत में सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें राहत मिली। वर्तमान में दोनों जमानत पर हैं और ट्रायल जारी है।
अन्य राज्यों में भी दर्ज हैं मामले:
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बेदीराम का नाम केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। भोपाल (Bhopal) स्थित मध्य प्रदेश STF (Madhya Pradesh STF) तथा राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) ने भी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में उन्हें नामजद आरोपी बनाया है। इन मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अभी अंतिम निर्णय नहीं आया है।
पुराने बयान और वायरल वीडियो भी चर्चा में:
करीब दो वर्ष पहले ओम प्रकाश राजभर का एक बयान भी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि नौकरी चाहिए तो बेदीराम से मिलिए। इसी दौरान बेदीराम का कथित रूप से नौकरी की डीलिंग करते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। हालांकि, उस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उस समय इस विषय पर पूर्व IPS अधिकारी राजेश पाण्डेय (Rajesh Pandey) से भी विशेष बातचीत की गई थी, जिसमें उन्होंने कई पहलुओं पर अपनी राय रखी थी।
हलफनामे में दर्ज हैं नौ आपराधिक मामले:
बेदीराम ने अपने चुनावी हलफनामे में नौ आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनमें अधिकांश मामले भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़े हैं। इनमें रेलवे ग्रुप-डी, रेलवे लोको पायलट, भोपाल-जयपुर रेलवे भर्ती, मध्य प्रदेश PCS, आयुर्वेद भर्ती तथा छत्तीसगढ़ CPMT भर्ती जैसे मामलों का जिक्र है। इन नौ मामलों में से आठ में अदालत आरोप तय कर चुकी है और सभी में ट्रायल जारी है। हालांकि, अब तक किसी भी मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है।
विधायक का पक्ष सामने नहीं आ सका:
एक मीडिया प्लेटफॉर्म के अनुसार, विधायक बेदीराम से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हर बार फोन उनके पीएस ने उठाया और बताया कि विधायक व्यस्त हैं तथा बाद में बात कराएंगे। हालांकि बाद में भी उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका। वहीं निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे ने कहा कि मामला हाईकोर्ट (High Court) में लंबित है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
नया कानून पुराने मामलों पर क्यों लागू नहीं होगा?:
प्रतियोगी परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘लोक परीक्षा अधिनियम 2024’ लागू किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राज्य स्तर पर पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है। इन कानूनों में दोषियों के लिए तीन से दस वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक अधिवक्ता का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20(1) के तहत किसी व्यक्ति को उसी कानून के आधार पर दंडित किया जा सकता है, जो अपराध के समय लागू था। इसलिए बाद में बने कानून के तहत पुराने मामलों में अधिक कठोर दंड लागू नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र:
पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को पत्र लिखकर कहा कि पेपर लीक को लेकर पूरे देश में नाराजगी है और केंद्र व राज्य सरकारें जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कर रही हैं। ऐसे में लगभग 20 वर्ष पुराने और अब तक लंबित पेपर लीक मामलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए तथा उनकी सुनवाई में तेजी लाई जानी चाहिए।
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