प्रयागराज (Prayagraj) में कथित 900 करोड़ रुपये के कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि किसी लंबित मामले में न्यायाधीश तक पहुंचने या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है, तो यह न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जाएगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल (Krishna Pahal) ने इस मामले से जुड़ी 76 जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की।
अंतिम आदेश से पहले बदला घटनाक्रम:
अदालत के अनुसार, मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी और केवल आदेश पारित किया जाना शेष था। इसी दौरान ऐसी जानकारी सामने आई कि संबंधित पक्षों की ओर से पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंचने और उन्हें प्रभावित करने का प्रयास किया गया। इस घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया और सभी संबंधित याचिकाओं को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दे दिया।
‘न्यायालय के इतिहास का काला दिन’:
अपने आदेश में न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने इस घटना को न्यायालय के इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था पूरी तरह इस विश्वास पर आधारित है कि न्यायाधीश केवल कानून, तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय देते हैं। यदि कोई व्यक्ति अदालत के बाहर न्यायाधीश से संपर्क स्थापित करने या किसी प्रकार का प्रभाव डालने की कोशिश करता है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है और आम नागरिकों के मन में भी निर्णयों की निष्पक्षता को लेकर संदेह उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार का कोई भी प्रयास भारतीय न्यायिक परंपरा, आचार संहिता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है तथा इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी:
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी लंबित मामले में न्यायाधीश से अदालत के बाहर संपर्क स्थापित करने का प्रयास न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है और इसे प्रभावित करने वाले प्रत्येक प्रयास को गंभीरता से देखा जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों की अनदेखी की गई तो समाज में यह गलत संदेश जाएगा कि न्यायिक आदेशों को प्रभावित किया जा सकता है।
दूसरी पीठ के समक्ष होंगी सभी याचिकाएं:
इस घटनाक्रम के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने इस मामले से जुड़ी सभी 76 जमानत याचिकाओं और संबंधित अन्य मामलों को 3 अगस्त 2026 को किसी दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
क्या है 900 करोड़ रुपये का कोडीन कफ सिरप मामला?:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने अप्रैल 2025 में कोडीनयुक्त कफ सिरप और अन्य नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार के रास्ते बांग्लादेश तक तस्करी करने वाले गिरोह का खुलासा होने का दावा किया गया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई। जांच में लगभग 900 करोड़ रुपये के कफ सिरप कारोबार से जुड़े प्रमाण मिलने का भी दावा किया गया।
जांच और कार्रवाई का दावा:
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 37 जिलों से 371 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि 1167 से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है। जांच में 834 करोड़ रुपये के कथित अवैध कारोबार के प्रमाण मिलने की बात भी कही गई है। इसके अलावा लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं जब्त किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ये दवाएं मुख्य रूप से गंभीर सूखी खांसी के इलाज में उपयोग होने वाला कोडीनयुक्त कफ सिरप थीं, जिनके नशे के रूप में दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है। मुख्य आरोपियों में भोला प्रसाद जायसवाल, किशन सिंह, विपिन राणा, अमित टाटा और अशोक सिंह सहित कई नाम शामिल बताए गए हैं।
मुख्य आरोपी को लेकर क्या दावा?:
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के दुबई में होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है, जबकि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। साथ ही यह भी बताया गया है कि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल ही में 12 आरोपियों के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। रिपोर्ट में यह आरोप भी प्रकाशित किया गया है कि इस पूरे मामले में कथित रूप से शामिल कुछ राजनीतिक व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि दवा कंपनियों, थोक कारोबारियों और मेडिकल दुकानों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इन आरोपों की पुष्टि न्यायालय द्वारा नहीं की गई है और मामले की सुनवाई एवं जांच की प्रक्रिया जारी है।
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