सेवराई। विंध्य-पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों की आपत्ति सामने आई है। सोमवार को सेवराई तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान तहसील मुख्यालय पहुंचे और प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण पर विरोध जताया। किसानों ने मांग की कि उनकी जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित कर उसी के आधार पर उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के बदले उचित मूल्य चाहते हैं।
सैकड़ों किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन:
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तहसील अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसान तहसील परिसर पहुंचे। किसानों के हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित नारे लिखी तख्तियां और बैनर थे। किसानों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सेवराई के उपजिलाधिकारी गजराज सिंह यादव को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अपनी आपत्तियों और मांगों को प्रशासन के सामने रखा।
उचित और न्यायसंगत मुआवजे की मांग:
किसानों ने कहा कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है तो उन्हें उसका उचित और न्यायसंगत मूल्य मिलना चाहिए। किसानों के अनुसार कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में यदि जमीन का अधिग्रहण कम दर पर किया गया तो भविष्य में उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसी को लेकर किसानों ने भूमि के वास्तविक मूल्य के आधार पर मुआवजा निर्धारित किए जाने की मांग उठाई।
बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की मांग:
किसानों की प्रमुख आपत्ति भूमि के बाजार मूल्य और प्रस्तावित मुआवजे को लेकर है। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में कृषि भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य मौजूदा सर्किल रेट अथवा स्टांप मूल्य से काफी अधिक है। किसानों का कहना है कि केवल सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा निर्धारित होने पर उन्हें उनकी जमीन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाएगा।
किसानों ने मांग की कि प्रभावित भूमि का निष्पक्ष और वास्तविक बाजार मूल्यांकन कराया जाए। इसके बाद उसी के आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया जाए। साथ ही भूमि के आधिकारिक निगोशिएशन के एवज में निर्धारित की जा रही राशि को भी सार्वजनिक करने की मांग की गई, ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजे की दरों के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
रितेश सिंह ने किसानों की मांग का किया समर्थन:
किसानों की मांग के समर्थन में जमानियां विधायक ओमप्रकाश सिंह के पुत्र एवं युवा नेता रितेश सिंह भी किसानों के साथ तहसील मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने उपजिलाधिकारी से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। रितेश सिंह ने कहा कि यदि सरकार किसानों की जमीन ले रही है तो उन्हें उचित सम्मान के साथ बाजार भाव का चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों की समस्याओं और आपत्तियों को सुनने के लिए सरकार और प्रशासन के प्रतिनिधियों को किसानों से सीधे संवाद करना चाहिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किए जाने की बात कही, ताकि किसानों में किसी तरह का भ्रम न रहे।
अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी रखने की मांग:
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि परियोजना से प्रभावित गांवों में निजी भूमि के सर्वे और अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। किसानों ने मांग की कि भूमि की पैमाइश, मूल्यांकन, निगोशिएशन और मुआवजा निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए। साथ ही भूमि मालिकों के कानूनी अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
चार थानों की पुलिस रही तैनात:
बड़ी संख्या में किसानों के तहसील मुख्यालय पहुंचने को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रभारी निरीक्षक गहमर नंद कुमार तिवारी के नेतृत्व में चार थानों की पुलिस तहसील परिसर में तैनात रही। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।
एसडीएम ने कहा, अभी रेट सूची जारी नहीं:
मामले को लेकर सेवराई के उपजिलाधिकारी गजराज सिंह यादव ने बताया कि किसानों के आपत्ति पत्र प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। मुआवजे की दरों को लेकर उठाई गई आपत्तियों के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी आधिकारिक रूप से रेट सूची जारी नहीं की गई है।
इस दौरान अब्दुल कलाम खान, शम्स तबरेज खान पिंटू, सुभाष यादव, अनिल सिंह, नन्हे सिंह, रजनीकांत सिंह, मिसबाहुद्दीन खान, राम इकबाल सिंह यादव, उपेंद्र यादव, अजय राय, खालिद खान, इमरान खान, फहद खान, अबूबकर खान और औरंगजेब खान सहित बड़ी संख्या में किसान एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल






