लखनऊ (Lucknow)। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों को बदलती जलवायु और बढ़ती आबादी की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई फसल प्रजातियों के विकास पर अधिक से अधिक शोध कराने पर जोर दिया गया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सोमवार को कृषि भवन सभागार में प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के सतत और धारणीय विकास के लिए शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि किसानों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार दिखाई दे।

नई प्रजातियों के विकास पर हो विशेष ध्यान:
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय अपनी विशेषज्ञता के अनुसार विशेष नई प्रजातियों को तैयार करने पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करे। उन्होंने बदलती जलवायु और बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों के अनुरूप कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उनका जोर ऐसी प्रजातियों के विकास पर रहा, जो वर्तमान परिस्थितियों में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकें और कृषि के सतत विकास में योगदान दें।
नियुक्तियों में ढिलाई पर जताई नाराजगी:
समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर कार्मिकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में अपनाई जा रही ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी रिक्त पदों के सापेक्ष नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरी तत्परता और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करने पर जोर दिया।
खाद्य के साथ पोषण सुरक्षा पर जोर:
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि फसलों की नई प्रजातियों के विकास के दौरान केवल खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पोषण सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित की जाने वाली प्रजातियां वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरी उतरनी चाहिए। इससे प्रदेश के कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।

सभी कृषि जलवायु क्षेत्रों को ध्यान में रखकर हो शोध:
कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों की परिस्थितियों, उपलब्ध सिंचाई साधनों और मौसम में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखकर अनुसंधान किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप शोध को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि विकसित की जाने वाली फसल प्रजातियां संबंधित क्षेत्रों के लिए अधिक उपयोगी हो सकें।
जैविक खाद से अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों पर जोर:
बैठक में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद से अधिक उत्पादन देने वाली फसल प्रजातियों के विकास पर भी विशेष बल दिया गया। कृषि मंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों के शोध को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर देते हुए ऐसी प्रजातियों के विकास की आवश्यकता बताई, जिनसे उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र में सतत विकास को भी बढ़ावा मिल सके।
बैठक में अधिकारी और कुलपति रहे मौजूद:
समीक्षा बैठक में कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव रवींद्र, विशेष सचिव ओपी वर्मा और लाल बहादुर यादव मौजूद रहे। इसके अलावा बांदा कृषि विश्वविद्यालय (Banda Agricultural University) के कुलपति एसवीएस राजू, मेरठ कृषि विश्वविद्यालय (Meerut Agricultural University) के कुलपति त्रिवेणी दत्त, कानपुर कृषि विश्वविद्यालय (Kanpur Agricultural University) के कुलपति संजीव गुप्ता और नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय (Narendra Agricultural University) के रजिस्ट्रार उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (Uttar Pradesh Agricultural Research Council) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, निदेशक कृषि टीएम त्रिपाठी सहित कृषि विभाग और विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
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