उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान संजय निषाद ने उन्हें बुके भेंट किया और मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे शिष्टाचार भेंट बताया।
मुलाकात के बाद सियासी चर्चाएं तेज: डॉ. संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल से पहले हुई इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि, संजय निषाद ने मुलाकात की वजह माता प्रसाद पांडेय की तबीयत पूछना और विभिन्न विषयों पर चर्चा करना बताया है।
भाजपा को लेकर संजय निषाद का बड़ा बयान: मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजय निषाद ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी ने दरवाजा बंद किया था, तब वे भाजपा के साथ चले गए थे। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा भी दरवाजा बंद करेगी तो वे दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे। उनके मुताबिक, वे उसी के साथ रहेंगे जो निषाद समाज के मुद्दों को हल करेगा। संजय निषाद ने यह भी बताया कि माता प्रसाद पांडेय की तबीयत खराब चल रही थी, इसलिए वे उनका हालचाल जानने पहुंचे थे। बातचीत में निषादों को अनुसूचित जाति में आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
भाजपा कार्यालय में टिकट को लेकर बैठक: संजय निषाद ने बताया कि माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात से ठीक एक दिन पहले शाम को भाजपा कार्यालय में प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह से उनकी बैठक हुई थी। इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर चर्चा हुई थी। इस बयान के बाद उनकी सपा नेता से मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
गोंडा हत्याकांड और आरक्षण पर चर्चा: मुलाकात के दौरान गोंडा के बर्तन कारोबारी विनोद साहनी की हत्या का मुद्दा भी उठा। संजय निषाद के मुताबिक, माता प्रसाद पांडेय ने उनकी ओर से निषाद समाज के लिए लड़ाई लड़ने की बात कही। इसके जवाब में संजय निषाद ने कहा कि यदि निषादों को पहले ही अनुसूचित जाति में शामिल कर लिया गया होता तो ऐसी घटनाओं की स्थिति नहीं आती, क्योंकि लोगों में एससी-एसटी एक्ट का भय होता। संजय निषाद ने 25 दिसंबर 2016 को तत्कालीन सपा सरकार द्वारा निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए जारी की गई अधिसूचना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने के पांच दिन बाद ही उसे वापस ले लिया गया था और ऐसा नहीं होना चाहिए था।
माता प्रसाद पांडेय से पहले अखिलेश भी मिले: 83 वर्षीय माता प्रसाद पांडेय की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही है। दो दिन पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनके आवास पर पहुंचे थे और उनका हालचाल जाना था। माता प्रसाद पांडेय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वे सात बार विधायक रह चुके हैं और सपा सरकार में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2024 में अखिलेश यादव के लोकसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था।
क्या है मुलाकात के पीछे सियासी संदेश?: संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं हैं। एक पक्ष इसे माता प्रसाद पांडेय की तबीयत खराब होने के चलते की गई शिष्टाचार भेंट मान रहा है। वहीं, दूसरी चर्चा यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संजय निषाद अपनी पार्टी के लिए गठबंधन में अधिक सीटें हासिल करने को लेकर भाजपा पर दबाव बना रहे हैं। संजय निषाद पहले भी सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि उचित सम्मान नहीं मिलने पर उनके लिए दूसरे विकल्प खुले हैं। निषाद पार्टी वर्ष 2019 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनी थी।
2022 में निषाद पार्टी का प्रदर्शन: वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। गठबंधन में निषाद पार्टी को 16 सीटें मिली थीं। इनमें 10 सीटों पर उसके प्रत्याशी अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरे थे, जिनमें छह ने जीत दर्ज की। वहीं, छह प्रत्याशियों ने भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था, जिनमें पांच विजयी हुए। बाद में मझवां विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के विधायक डॉ. विनोद कुमार बिंद ने 2024 में भदोही लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया। इसके बाद विधानसभा में निषाद पार्टी के कुल पांच विधायक रह गए।
निषाद समाज के वोट का सियासी महत्व: राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी में निषाद समाज की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत है। मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, निषाद और कश्यप जैसे उपनामों से पहचाने जाने वाले इस समाज की कई विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, संतकबीर नगर, मिर्जापुर, भदोही, प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर, फतेहपुर और हमीरपुर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जैसे जिलों में निषाद समाज की अच्छी आबादी बताई जाती है।
क्लिनिक से राजनीति तक संजय निषाद का सफर: डॉ. संजय निषाद का जन्म 7 जून 1965 को गोरखपुर में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वे इलेक्ट्रो-होम्योपैथिक क्लिनिक चलाते थे। वर्ष 2002 में उन्होंने पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथिक एसोसिएशन का गठन किया। वर्ष 2008 में वे बामसेफ से जुड़े और इसके बाद मछुआ समाज को एकजुट करने की मुहिम शुरू की। उन्होंने पहली बार गोरखपुर की कैंपियरगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2013 में उन्होंने राजनीतिक दल निषाद पार्टी का गठन किया। वर्ष 2018 में निषाद पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन किया और संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने सपा के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ आ गई। वर्ष 2022 में भाजपा ने डॉ. संजय निषाद को विधान परिषद सदस्य बनाया। वर्तमान में वे योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
कई बार अपनी सरकार पर सवाल उठा चुके हैं: कैबिनेट मंत्री रहते हुए संजय निषाद कई मौकों पर अपनी ही सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठा चुके हैं। गोंडा के बर्तन कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के बाद उन्होंने लखनऊ में केजीएमयू के बाहर और बाद में गोंडा कलेक्ट्रेट में धरना दिया था। उन्होंने अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अगस्त 2026 में निषाद आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा के साथ रहने की बात कहते हुए देरी होने पर धरना देने की चेतावनी दी थी। जून 2026 में गाजीपुर के कमलेश बिंद एनकाउंटर को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। जनवरी 2026 में निषाद पार्टी के स्थापना दिवस पर उन्होंने कहा था कि मछुआ समाज किसी एक पार्टी का वोटबैंक नहीं है। जुलाई 2024 में उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार और अधिकारियों पर सवाल उठाए थे। अप्रैल 2023 में ‘मछुआ कल्याण कोष’ के लिए बजट जारी नहीं होने पर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी।
आगे क्या होगा, इस पर निगाहें: संजय निषाद की माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात, भाजपा कार्यालय में टिकट बंटवारे को लेकर बैठक और भाजपा के दरवाजा बंद करने की स्थिति में दूसरे विकल्प तलाशने वाले बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। फिलहाल संजय निषाद ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन चुनाव से पहले हुई इस राजनीतिक गतिविधि पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#SanjayNishad #MataPrasadPandey #UPPolitics #NishadParty #SamajwadiParty #BJP #UttarPradesh
संजय निषाद, माता प्रसाद पांडेय, उत्तर प्रदेश राजनीति, निषाद पार्टी, समाजवादी पार्टी, भाजपा, विधानसभा चुनाव, निषाद समाज







