बलिया: जंगली बाबा धाम महोत्सव से पहले विवाद, ‘बालक बाबा’ के हटने से मची हलचल
बलिया के गड़वार स्थित संत शिरोमणि श्री जंगली बाबा धाम में परिनिर्वाण शताब्दी वर्ष के अवसर पर 28 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक 54 कुंडीय श्री हरिहरात्मक महायज्ञ और विराट रामकथा का आयोजन प्रस्तावित है। इस 11 दिवसीय महोत्सव में चिन्मयानंद बापू और पुण्डरीक गोस्वामी समेत देश के कई प्रमुख संतों और कथावाचकों के शामिल होने की बात कही गई है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल है, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही प्रबंधन समिति में आंतरिक विवाद सामने आ गया है। स्वामी रामभद्र कर्पात्री उर्फ ‘बालक बाबा’ ने समिति पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आयोजन से दूरी बना ली है। इस घटनाक्रम के बाद महोत्सव की तैयारियों और समिति के कामकाज को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
28 अक्टूबर से शुरू होगा 11 दिवसीय महोत्सव:
गड़वार स्थित जंगली बाबा धाम में परिनिर्वाण शताब्दी वर्ष के तहत धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। 28 अक्टूबर से 7 नवंबर तक चलने वाले इस महोत्सव में 54 कुंडीय श्री हरिहरात्मक महायज्ञ और विराट रामकथा प्रमुख आकर्षण होंगे। आयोजन में चिन्मयानंद बापू और पुण्डरीक गोस्वामी सहित कई संतों और कथावाचकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों का माहौल है। हालांकि, महोत्सव से ठीक पहले प्रबंधन समिति से जुड़े विवाद ने कार्यक्रम को लेकर एक अलग चर्चा छेड़ दी है।
बालक बाबा ने समिति पर लगाया उपेक्षा का आरोप:
स्वामी रामभद्र कर्पात्री ‘बालक बाबा’ ने प्रबंधन समिति के कुछ सदस्यों पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वह लंबे समय से महायज्ञ की रूपरेखा तैयार करने में लगे हुए थे, लेकिन इसके बावजूद समिति में उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
बालक बाबा के अनुसार, समिति के कुछ सदस्य पद और आर्थिक प्रभाव के चलते उनकी बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसी बात से नाराज होकर उन्होंने आयोजन से दूरी बनाने का फैसला किया है। हालांकि, ये आरोप बालक बाबा की ओर से लगाए गए हैं और उपलब्ध जानकारी में समिति के संबंधित सदस्यों का पक्ष सामने नहीं आया है।
महायज्ञ से नहीं, समिति के रवैये से विरोध:
बालक बाबा ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध धार्मिक आयोजन से नहीं है, बल्कि वह समिति के कथित मनमाने रवैये से असहमत हैं। उनका कहना है कि महायज्ञ की तैयारियों में लंबे समय से योगदान देने के बावजूद उनकी उपेक्षा की गई।
इस बयान के बाद विवाद का केंद्र धार्मिक कार्यक्रम के बजाय आयोजन की व्यवस्थाओं और प्रबंधन समिति के भीतर आपसी तालमेल पर आ गया है। महोत्सव से पहले सामने आए इस मतभेद ने समिति की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
महोत्सव की तैयारियों के बीच बढ़ी चर्चा:
एक ओर जंगली बाबा धाम में महायज्ञ और रामकथा जैसे धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर समिति के भीतर मतभेद की खबर सामने आई है। बालक बाबा के आयोजन से अलग होने के फैसले ने इस विवाद को चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद की वजह समिति के कुछ सदस्यों पर लगाए गए उपेक्षा के आरोप हैं। समिति की ओर से इस संबंध में कोई पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की स्थिति संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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रिपोर्टर: अमित कुमार