गाजीपुर: समावेश फाउंडेशन की पहल: बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ उठी आवाज
गाजीपुर के करंडा क्षेत्र के विशुनपुरा गांव में समावेश फाउंडेशन की ओर से बालिका दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, लैंगिक भेदभाव के प्रति जागरूकता फैलाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का संदेश दिया गया। समावेश फाउंडेशन के यूथ ग्रुप लीडर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में युवा कार्यकर्ताओं और बालिकाओं ने चार्ट पेपर, कलाकृतियों और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। कार्यक्रम में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और समान अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया।

नुक्कड़ नाटक से बाल विवाह के दुष्परिणामों का संदेश:
कार्यक्रम के दौरान युवा कार्यकर्ताओं और बालिकाओं ने चार्ट पेपर तथा विभिन्न कलाकृतियों के जरिए अपने विचार प्रस्तुत किए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया। इसके जरिए लोगों को इस सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
इस दौरान बालिकाओं ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों, लैंगिक भेदभाव और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर भी अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने समाज में बेटा-बेटी के बीच समानता स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका को शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
आत्मरक्षा के तरीकों की दी गई जानकारी:
कार्यक्रम में संसाधन विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित सुष्मिता भारती ने बालिकाओं को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आत्मरक्षा से जुड़े कुछ व्यावहारिक तरीके समझाए और बालिकाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और परिस्थितियों के प्रति जागरूक रहने के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम के इस हिस्से का उद्देश्य बालिकाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत करना और उनमें आत्मविश्वास विकसित करना रहा।
परिवार से शुरू हो सामाजिक बदलाव:
कार्यक्रम के अंत में समावेश फाउंडेशन के प्रबंधक मोहम्मद हस्सान ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत दूसरों से नहीं, बल्कि स्वयं और अपने परिवार से करनी होगी। बालिका शिक्षा, लैंगिक समानता और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले परिवारों में समानता को अपनाया जाए।
उन्होंने कहा कि परिवार में बेटा और बेटी के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। दोनों को शिक्षा, सम्मान, निर्णय लेने और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल मंचों से समानता की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे अपने व्यवहार और जीवन में भी अपनाना जरूरी है।
बालिकाओं को समान अवसर देने की अपील:
कार्यक्रम के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि बालिकाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। समावेश फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के साथ समाज में समानता के महत्व को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित:
इस अवसर पर विशुनपुरा के ग्राम प्रधान बृजराम, समावेश फाउंडेशन के मोबिलाइजर अनिल यादव और सुनीता देवी सहित सुरेश गौतम, अभिषेक आजाद, सोनाली पांडेय, आकृति सिंह, गरिमा, रिमझिम, रिंकी, सुहानी, आशुगुंजन, तेजस्वी और संगीता समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
#Tags: #Ghazipur #GirlChildDay #GirlEducation #StopChildMarriage #GenderEquality
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
रिपोर्टर: जफर इकबाल