अमेठी के लोधवरिया में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, डॉ. सुमनलता उनियाल ने बताई भक्ति की महिमा
अमेठी (Amethi) जिले की तिलोई तहसील क्षेत्र के लोधवरिया में श्री कामतानाथ भंडारा कमेटी, मोहनगंज के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान कथा व्यास डॉ. सुमनलता उनियाल दीदीजी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा में भगवान की महिमा, भक्तों के चरित्र और जीवन कल्याण से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक जीवन के महत्व और भगवान की भक्ति के प्रति समर्पण का संदेश दिया जा रहा है।

श्रीमद्भागवत कथा में बताया गया जीवन कल्याण का मार्ग:
कथा व्यास डॉ. सुमनलता उनियाल दीदीजी, यमुनोत्री धाम, उत्तरकाशी, उत्तराखंड से पधारीं हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके माध्यम से प्राणियों के कल्याण का संदेश दिया। कथा में बताया गया कि भगवान की भक्ति, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम है। श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के प्रसंगों के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन के मूल्यों को समझने का संदेश दिया जा रहा है।
राजा परीक्षित को श्रीसुकदेव जी ने सुनाई भागवत कथा:
कथा के दौरान श्रीसुकदेव जी महाराज और राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन किया गया। इसमें बताया गया कि राजा परीक्षित को मृत्यु के भय से मुक्ति और उसके समाधान के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण करने की प्रेरणा दी गई। कथा के अनुसार, भागवत श्रवण के लिए व्यक्ति का जितेंद्रिय, जितश्वास और जितसंग होना आवश्यक बताया गया है। इसका आशय इंद्रियों पर नियंत्रण रखने, एकाग्रता बनाए रखने और दुर्जनों की संगति से दूर रहने से है।
ध्रुव जी की भक्ति का किया वर्णन:
श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव जी के जीवन से जुड़े प्रसंग का भी वर्णन किया गया। बताया गया कि ध्रुव जी ने बाल्यावस्था में ही भगवान की प्राप्ति के लिए भक्ति का मार्ग अपनाया था। नारद जी से प्राप्त बारह अक्षरों के महामंत्र का जाप कर उन्होंने भगवान की आराधना की। कथा में ध्रुव जी की भक्ति और भगवान के प्रति उनकी श्रद्धा के प्रसंग के माध्यम से भक्तों को समर्पण तथा दृढ़ विश्वास का संदेश दिया गया।

भगवान के नाम संकीर्तन की महिमा:
कथा के दौरान श्रीसुकदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए बताया गया कि भक्तों की कथाओं और भगवान के चरित्र का श्रवण आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। जहां भगवान के नाम का स्मरण, चर्चा और श्रद्धाभाव से कथा का रसास्वादन किया जाता है, वहां भक्ति का वातावरण बनता है। कथा में भगवान के नाम संकीर्तन को उनकी प्रसन्नता प्राप्त करने का माध्यम बताया गया।
यजमान और आयोजन में शामिल हुए गणमान्य लोग:
इस श्रीमद्भागवत कथा के यजमान सुमन कुमार त्रिपाठी और गीता त्रिपाठी हैं। कथा का शुभारंभ राकेश त्रिपाठी, समाजसेवी, अयोध्या से पधारे स्वामी हरि नारायण आचार्य, कर्ण कुमार बाजपेई, सदसपुर जिला पंचायत, सरोज तिवारी, सुजीत मिश्रा, राजीव सिंह एडवोकेट, दुर्योधन सिंह, रोहित त्रिपाठी, बृजेंद्र सिंह, आदर्श शुक्ला, आशीष जायसवाल, शरद गुप्ता, राकेश कुमार पांडे, मनीष कुमार बाजपेई, वीके मिश्रा, अनिल कुमार बाजपेई और संतोष त्रिपाठी सहित अन्य लोगों की उपस्थिति में हुआ। आयोजन के दौरान श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं।
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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह