यूपी चुनाव आयोग ने माफी मांगी:कहा था- शुक्र है, राम ने अल्पसंख्यक को नहीं मारा
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया खाते से की गई एक पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई, जिसके बाद करीब 24 घंटे बाद आयोग ने माफी मांग ली। विवाद की शुरुआत मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसे नाम को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की ओर से उठाए गए सवालों के बाद हुई थी। इस मामले में संजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। वहीं, आयोग ने अपनी पिछली पोस्ट की भाषा को पद की गरिमा के अनुरूप नहीं माना और भविष्य में मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने की बात कही।
विवादित पोस्ट पर आयोग ने जताया खेद:
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक खाते से मंगलवार को जारी संदेश में कहा गया कि पिछली पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा और शब्द पद की गरिमा के अनुरूप नहीं थे। आयोग ने पोस्ट से आहत लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि आगे से केवल मर्यादित बातें ही साझा की जाएंगी।
पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी। इसके बाद आयोग ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए खेद जताया। बयान में यह भी कहा गया कि पोस्ट की भाषा और उसका तीखा भाव आधिकारिक खाते की प्रकृति के अनुरूप नहीं था तथा इससे लोगों में पैदा हुई नाराजगी को गंभीरता से लिया गया है।
संजय सिंह ने मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल:
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने मतदाता सूची में दर्ज ‘राम ने यादव को मारा’ जैसे नाम का मुद्दा उठाया था। उन्होंने राजेश यादव नाम के व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए चुनाव आयोग से सवाल किया था।
संजय सिंह ने पूछा था कि आखिर ‘राम ने यादव को ही क्यों मारा’? उन्होंने सवाल किया कि सूची में सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय और बिष्ट जैसे उपनामों के साथ इस तरह के नाम क्यों नहीं दिखाई देते। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आयोग का कंप्यूटर जातिवादी है या किसी राजनीतिक दल का एजेंडा चलाया जा रहा है।
आयोग के जवाब पर बढ़ा विवाद:
संजय सिंह के सवालों के जवाब में आयोग के आधिकारिक खाते से एक पोस्ट की गई थी। इसमें कहा गया था कि राम ने शर्मा को भी मारा और फिर टिप्पणी की गई कि अच्छा हुआ किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना सांप्रदायिक होने का आरोप लगता। इसी टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर आयोग की आलोचना शुरू हो गई।
विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने अपनी पोस्ट की भाषा पर माफी मांगी। इस घटनाक्रम ने मतदाता सूची में दर्ज नामों और आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर बहस खड़ी कर दी।
कांग्रेस की सीटों की मांग पर संजय सिंह का सवाल:
संजय सिंह ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछली बार करीब 2.50 प्रतिशत वोट पाने वाली कांग्रेस किस आधार पर 200 सीटों की मांग कर रही है।
उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां भी कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ इसी तरह का रवैया अपनाया था। संजय सिंह के मुताबिक, उस समय आप को छह में से दो सीटें देने की बात कही जा रही थी, लेकिन बाद में कांग्रेस की ओर से फोन उठाना भी बंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि आखिर में कांग्रेस भाजपा से महज 0.50 प्रतिशत मतों के अंतर से हार गई।
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप सपा में होंगे शामिल:
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक कुनबे का विस्तार करने में जुटी है। इसी क्रम में आंवला से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के मंगलवार को समाजवादी पार्टी में शामिल होने का कार्यक्रम बताया गया है।
लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र कश्यप अपने समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल होंगे।
मुजफ्फरनगर में मंत्री और सपा नेता के बीच नोकझोंक:
मुजफ्फरनगर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के एक कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और सपा नेता राकेश शर्मा के बीच माइक को लेकर विवाद होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि मंत्री लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी सपा नेता ने उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की। मंत्री ने माइक नहीं छोड़ा, जिसके बाद दोनों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। इस दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच भी विवाद होने की बात कही गई है।
कानपुर में भाजपा विधायक के बयान पर चर्चा:
कानपुर के किदवई नगर से भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी के बयान का भी उल्लेख सामने आया है। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब आठ बजे वह गोविंद नगर की विद्यार्थी मार्केट में दो दुकानदारों के बीच विवाद सुलझाने पहुंचे थे। इस दौरान गाली-गलौज और धमकी की जानकारी मिलने पर वह नाराज हो गए।
विवाद के दौरान विधायक ने गाली देने वालों के खिलाफ कड़ी भाषा में चेतावनी दी। उनके बयान में अपशब्दों का इस्तेमाल भी शामिल था। यह घटना स्थानीय विवाद के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर चर्चा में आई।
इन घटनाक्रमों में चुनाव आयोग की पोस्ट पर माफी, विपक्षी दलों के बीच सीटों को लेकर बयानबाजी, सपा में संभावित राजनीतिक शामिल होने और अलग-अलग स्थानों पर नेताओं के बीच विवाद जैसे मुद्दे सामने आए हैं।
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