लखनऊ: योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, बेसिक-माध्यमिक शिक्षा के 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मियों को मिलेगा कैशलेस इलाज
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित पांच कालिदास मार्ग पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस निर्णय से बेसिक, माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा से जुड़े कुल 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को लाभ मिलेगा। पात्र कर्मचारियों को सरकारी अस्पतालों के साथ योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी भर्ती होकर उपचार कराने की सुविधा दी जाएगी। इस योजना पर राज्य सरकार सालाना लगभग 51.11 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
बेसिक शिक्षा के 1,22,304 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ:
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा परिवार को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
योजना के तहत परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन विद्यालयों तथा समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत 1,22,304 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को सुविधा मिलेगी। प्रत्येक कर्मचारी के लिए तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इस मद में करीब 36.69 करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जाएंगे।
माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा के 48,062 कर्मियों को राहत:
माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। इन कर्मचारियों की ओर से स्वास्थ्य सुरक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों और वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। इनके लिए तीन हजार रुपये प्रति कर्मचारी वार्षिक प्रीमियम के आधार पर राज्य सरकार लगभग 14.42 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी।
साचीज के माध्यम से होगा कैशलेस उपचार:
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि दोनों विभागों के कुल 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सरकार सालाना लगभग 51.11 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को राजकीय अस्पतालों के साथ साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी उपचार की सुविधा मिलेगी। उपचार के लिए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की अनुमोदित दरों को आधार बनाया जाएगा।
सरकार उठाएगी बीमा प्रीमियम का पूरा खर्च:
योजना के तहत प्रत्येक पात्र शिक्षणेत्तर कर्मचारी के लिए तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम का भुगतान सरकार करेगी। बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,304 कर्मचारियों के लिए लगभग 36.69 करोड़ रुपये और माध्यमिक एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के 48,062 कर्मचारियों के लिए करीब 14.42 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दोनों विभागों को मिलाकर वार्षिक वित्तीय भार लगभग 51.11 करोड़ रुपये होगा।
इस निर्णय से शिक्षा विभागों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हुआ है। सरकार ने योजना के संचालन की जिम्मेदारी साचीज को सौंपने की जानकारी दी है।
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