अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत…
गाजीपुर से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) को शस्त्र लाइसेंस से जुड़े तीन मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने तीनों मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, इन मामलों में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने को लेकर अभी कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है। प्राथमिकी रद्द करने की मांग पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
तीन मामलों में गिरफ्तारी पर रोक:
अफजाल अंसारी के खिलाफ गाजीपुर कोतवाली में शस्त्र लाइसेंस से संबंधित तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। ये मामले अपराध संख्या 535, 551 और 554 के तहत दर्ज किए गए हैं। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमों में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120बी और 419 के साथ शस्त्र अधिनियम की धाराओं 21, 25 और 30 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
अफजाल अंसारी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में तीनों प्राथमिकी को रद्द करने के साथ कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। अदालत ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की है।
डीएम कार्यालय की पत्रावलियों से जुड़ा मामला:
मामला अफजाल अंसारी के नाम स्वीकृत तीन अलग-अलग शस्त्र लाइसेंसों की पत्रावलियों से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि इन शस्त्र लाइसेंसों से संबंधित पत्रावलियां गाजीपुर के जिलाधिकारी कार्यालय से गायब हो गई थीं। इसी मामले को लेकर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान इन पत्रावलियों के पुराने होने का मुद्दा भी उठाया गया। अफजाल अंसारी की ओर से यह दलील दी गई कि जिन पत्रावलियों के गायब होने को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, वे वर्ष 1983 से 1987 के बीच की हैं, जबकि संबंधित प्राथमिकी वर्ष 2026 में दर्ज की गई हैं।
अफजाल अंसारी की ओर से रखी गई दलील:
सुनवाई के दौरान अफजाल अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि शस्त्र लाइसेंस से संबंधित पत्रावलियां जिलाधिकारी कार्यालय की अभिरक्षा में थीं। ऐसे में उनके गायब होने में अफजाल अंसारी की कोई भूमिका नहीं है।
अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि जिन दस्तावेजों के गायब होने को आधार बनाकर प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, वे कई दशक पुराने हैं। इसी आधार पर याचिका में दर्ज मामलों को समाप्त करने और कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।
राज्य सरकार से मांगा जवाब:
सोमवार को जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जेके उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने मामलों की सुनवाई की। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब के प्रत्युत्तर में अफजाल अंसारी की ओर से एक सप्ताह के भीतर रिज्वाइंडर दाखिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत मामले में आगे सुनवाई करेगी।
तीन सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल तीनों मामलों में अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। हालांकि, प्राथमिकी रद्द करने की मांग पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अदालत के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी और उसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से उसका प्रत्युत्तर दिया जाएगा।
अब तीन सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में तीनों प्राथमिकी को रद्द करने की मांग पर आगे बहस होगी। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के चलते इन तीन मामलों में अफजाल अंसारी को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिली है। प्राथमिकी के संबंध में अंतिम निर्णय अगली सुनवाई और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
कानूनी स्थिति:
इस मामले में अदालत ने अभी केवल गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई है। प्राथमिकी रद्द किए जाने का अंतिम आदेश नहीं दिया गया है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध या असिद्ध नहीं माना जा सकता। आगे की कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और उसके बाद पारित आदेश से स्पष्ट होगी।
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