यूपी का हर तीसरा नेता दलबदलू, इनमें 122 विधायक भी:मंत्री-सांसद भी पीछे नहीं, कुछ ने 5 बार पार्टी बदली; देखिए पूरी लिस्ट
Lucknow (लखनऊ) समेत पूरे Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) की राजनीति में एक बार फिर दलबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किस नेता का अगला राजनीतिक ठिकाना कौन-सा होगा, इसे लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। राज्य की राजनीति में दल बदलने की प्रवृत्ति कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले डेढ़ दशक के आंकड़े इस प्रवृत्ति की व्यापकता को स्पष्ट करते हैं। कई नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अलग-अलग समय पर कई राजनीतिक दलों का दामन थामा, जबकि कुछ नेता पुराने दल में लौटने के बाद भी अवसर मिलने पर फिर दूसरी पार्टी में शामिल हो गए। Uttar Pradesh Government (उत्तर प्रदेश सरकार) में मंत्री Dara Singh Chauhan (दारा सिंह चौहान) अब तक पांच बार पार्टी बदल चुके हैं। 15 वर्षों के राजनीतिक रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश के मौजूदा 399 विधायकों में 122 विधायक ऐसे हैं, जो किसी न किसी समय दल बदल चुके हैं। यही स्थिति सांसदों के मामले में भी देखने को मिलती है।
भाजपा में सबसे अधिक दूसरे दलों से आए विधायक:
राज्य के मौजूदा विधायकों के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक दलबदलू विधायक BJP (भाजपा) में हैं। यदि SP (सपा) से निष्कासित होकर भाजपा में पहुंचे विधायकों को भी शामिल किया जाए तो पार्टी का संख्या बल 260 तक पहुंचता है। इनमें 78 विधायक ऐसे हैं, जो पहले किसी अन्य दल में रहे और बाद में भाजपा में शामिल हुए। यह कुल विधायकों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। दूसरी ओर SP (सपा) में भी 29 विधायक दूसरे दलों से आए हैं, जो करीब 28 प्रतिशत होते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP (बसपा) छोड़कर 12 नेता सपा में आए थे, जिनमें से पांच विधायक बनने में सफल रहे।
बसपा को सबसे अधिक राजनीतिक नुकसान:
बीते 15 वर्षों में दलबदल का सबसे अधिक असर BSP (बसपा) पर पड़ा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के 15 से अधिक मौजूदा विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी। 2017 में बसपा के 19 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन 2022 के चुनाव तक आते-आते उनमें से 15 विधायक अन्य दलों में शामिल हो गए। वर्तमान समय में बसपा के पास केवल एक विधायक बचा है। भाजपा की सहयोगी पार्टियों में भी दलबदल की स्थिति देखने को मिलती है। Nishad Party (निषाद पार्टी) के लगभग 80 प्रतिशत, SBSP (सुभासपा) के 50 प्रतिशत, RLD (रालोद) के 33 प्रतिशत और Apna Dal (S) (अपना दल एस) के 31 प्रतिशत विधायक दूसरे दलों से आए हैं। वहीं Congress (कांग्रेस) के भी लगभग 50 प्रतिशत विधायक दलबदल की श्रेणी में आते हैं।
लोकसभा में भी दिखाई देता दलबदल का प्रभाव:
Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा के 80 सांसद चुने गए हैं। इनमें सबसे अधिक दलबदलू सांसद SP (सपा) के हैं। पार्टी के 37 सांसदों में से 19 पहले अन्य दलों में रह चुके हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीती थीं और इसमें दूसरे दलों से आए नेताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। दूसरी ओर BJP (भाजपा) के 33 सांसदों में से 15 सांसद अन्य दलों से होकर भाजपा में पहुंचे हैं। इस प्रकार पार्टी के लगभग 45 प्रतिशत सांसद दलबदल की श्रेणी में आते हैं, जबकि 18 सांसद पार्टी के मूल कैडर से जुड़े रहे हैं।
कांग्रेस और सहयोगी दलों में भी दलबदल:
Congress (कांग्रेस) के छह सांसदों में से तीन ऐसे हैं, जिन्होंने राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार पार्टी बदली। इनमें Imran Masood (इमरान मसूद), Rakesh Rathore (राकेश राठौर) और Ujjwal Raman Singh (उज्ज्वल रमण सिंह) शामिल हैं। वहीं Rahul Gandhi (राहुल गांधी), Kishori Lal Sharma (किशोरी लाल शर्मा) और Tanuj Punia (तनुज पुनिया) लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। सहयोगी दल RLD (रालोद) के दो सांसदों में से एक सांसद भी दूसरे दल से आकर पार्टी में शामिल हुआ है।
कई नेताओं का रहा अलग-अलग दलों का सफर:
Agra (आगरा) से भाजपा सांसद SP Singh Baghel (एसपी सिंह बघेल) अपने राजनीतिक जीवन में दो बार दल बदल चुके हैं। उन्होंने पहले SP (सपा) से राजनीति की शुरुआत की, बाद में BSP (बसपा) में गए और फिर BJP (भाजपा) में शामिल होकर लगातार 2014, 2019 और 2024 में सांसद चुने गए। इसी तरह Sakshi Maharaj (साक्षी महाराज) ने भी भाजपा छोड़कर सपा का दामन थामा और बाद में दोबारा भाजपा में लौटे। वर्तमान Uttar Pradesh Government (उत्तर प्रदेश सरकार) में मंत्री Nand Gopal Nandi (नंद गोपाल नंदी) भी अपने राजनीतिक जीवन में बसपा, कांग्रेस और भाजपा का हिस्सा रह चुके हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री Rakesh Sachan (राकेश सचान) ने भी सपा से कांग्रेस और फिर भाजपा तक का राजनीतिक सफर तय किया।
दारा सिंह चौहान सबसे अधिक बार बदल चुके पार्टी:
प्रदेश सरकार के मंत्रियों में Dara Singh Chauhan (दारा सिंह चौहान) सबसे अधिक बार दल बदलने वाले नेताओं में शामिल हैं। वह अब तक पांच बार अलग-अलग राजनीतिक दलों का हिस्सा बन चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य मंत्री भी एक, दो या तीन बार दल बदलने के बाद विधायक, सांसद और मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे हैं।
गठबंधन बदलने में भी पीछे नहीं राजनीतिक दल:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में केवल नेता ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दल भी समय-समय पर अपने गठबंधन बदलते रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में NDA (एनडीए) की सरकार है, जिसमें BJP (भाजपा) के साथ Apna Dal (S) (अपना दल एस), RLD (रालोद), SBSP (सुभासपा) और Nishad Party (निषाद पार्टी) शामिल हैं। इनमें अपना दल (एस) और निषाद पार्टी लगातार भाजपा के साथ रही हैं, जबकि रालोद और सुभासपा ने अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया।
रालोद ने कई बार बदले राजनीतिक साथी:
RLD (रालोद) ने विभिन्न चुनावों में अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन किया। वर्ष 1999 से 2003 तक पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रही। वर्ष 2003 से 2007 तक सपा के साथ, 2009 से 2011 तक फिर भाजपा के साथ, 2011 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ रही। वर्ष 2018 से 2024 तक पार्टी ने सपा के साथ चुनाव लड़ा, जबकि 2024 के बाद एक बार फिर एनडीए में शामिल हो गई।
सुभासपा ने भी कई बार बदले राजनीतिक समीकरण:
SBSP (सुभासपा) और उसके प्रमुख Om Prakash Rajbhar (ओम प्रकाश राजभर) ने भी समय-समय पर अपने राजनीतिक सहयोगी बदले। वर्ष 2017 से 2021 तक पार्टी भाजपा के साथ एनडीए में रही और ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में मंत्री बने। वर्ष 2021 से 2023 के बीच पार्टी ने एनडीए छोड़कर सपा के साथ चुनाव लड़ा और 18 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटें जीतीं। इसके बाद वर्ष 2023 में सपा से अलग होकर पार्टी फिर एनडीए में शामिल हो गई। लोकसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर दोबारा योगी सरकार में मंत्री बने और वर्तमान में पंचायती राज मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं।
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