राहुल बोले-लोगों की आवाज दबा रही सरकार, अब चुप नहीं रहेंगे
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर लोगों को अपनी बात रखने से रोकने का आरोप लगाया। दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के ‘रचनात्मक कांग्रेस प्रकोष्ठ’ अधिवेशन में उन्होंने कहा कि सरकार व्यवस्था लागू करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का काम भारत को अपनी बात कहने का अवसर देना है। राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपनी परेशानी और पीड़ा सामने रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोका गया। उन्होंने दावा किया कि सरकार को अब समझ आ गया है कि लोग चुप रहने वाले नहीं हैं।
सरकार पर अभिव्यक्ति रोकने का आरोप:
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर पर छात्र अपनी समस्याओं और परेशानियों को सामने रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी बात कहने से रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार व्यवस्था लागू करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का उद्देश्य भारत को अपनी बात कहने का मौका देना है। राहुल ने दावा किया कि सरकार को अब यह एहसास हो चुका है कि लोग अपनी आवाज दबाकर चुप नहीं बैठेंगे।
विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना:
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की विदेश नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री की कूटनीति पर तंज कसते हुए कहा कि यह विदेशी नेताओं को गले लगाने से आगे कुछ ज्यादा दिखाई नहीं देती।
राहुल ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि प्रधानमंत्री के मन में यह विचार कहां से आया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे गले लगाना ही विदेश नीति का हिस्सा बन गया है।
राहुल ने सरकार और अमित शाह पर भी साधा निशाना:
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि उनकी कोशिशें सरकार को परेशान कर सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) रात में सो नहीं पाते। हालांकि, उन्होंने इसके पीछे अन्य कारण होने की संभावना भी जताई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि पहले उन्हें चाणक्य और सरदार पटेल जैसे नामों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वह संसद में प्रवेश तक नहीं कर पाए। राहुल के मुताबिक, ऐसा इसलिए है क्योंकि पहली बार उन्हें भारत की आवाज और उसकी अभिव्यक्ति का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल बोले, डरकर चुप रहने की जरूरत नहीं:
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि भारत में कई लोग कायरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई के दौरान डरने की बात करे तो उसे समझा जा सकता है, लेकिन मौजूदा समय में जिन लोगों से मुकाबला है, उनके बारे में उन्होंने तीखी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि आज ऐसे लोगों से लड़ाई है, जिन्हें उनके मुताबिक भारत के दर्शन और इतिहास का ज्ञान नहीं है। राहुल ने अपने संबोधन में राजनीतिक विरोध के बीच अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति के अधिकार की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अभिव्यक्ति को खत्म करने की बात होगी, तो वह उसकी भी रक्षा करेंगे। राहुल ने इसे अभिव्यक्ति के अधिकार के व्यापक सिद्धांत से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
संदीप दीक्षित को गले लगाकर मेलोनी का जिक्र:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित (Sandeep Dikshit) को गले लगा लिया। इसी दौरान दीक्षित ने मजाकिया अंदाज में राहुल से पूछा कि उन्होंने उन्हें जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) समझकर तो नहीं पकड़ा था।
इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया कि वह अभी वहां तक नहीं पहुंचे हैं। मंच पर हुई इस बातचीत से वहां मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
दो दिवसीय अधिवेशन में कई मुद्दों पर चर्चा:
रचनात्मक कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन 12 अगस्त को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित किया गया था। इसमें सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, अकादमिक जगत से जुड़े लोगों, कलाकारों, समुदाय के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
अधिवेशन के पहले दिन अर्थव्यवस्था, रोजगार, गरीबी और असमानता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही पर्यावरण, विकास, विस्थापन और प्रदूषण से जुड़े विषयों को भी चर्चा में शामिल किया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, अधिकार, संस्कृति और शोध जैसे विषयों पर भी अलग-अलग स्तर पर विचार-विमर्श हुआ। अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) भी मौजूद थे।
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के संबोधन में सरकार की नीतियों, अभिव्यक्ति के अधिकार, छात्रों के प्रदर्शन और विदेश नीति को लेकर कई मुद्दे उठाए गए। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस की भूमिका को लोगों को अपनी बात कहने का अवसर देने से जोड़ते हुए सरकार पर राजनीतिक हमला भी किया।
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