गाजीपुर: मोहम्मदाबाद महिला अस्पताल की बदहाली उजागर, इलाज से ज्यादा मरीजों की मजबूरी बनी बड़ी समस्या
मोहम्मदाबाद (Mohammadabad) के गाजीपुर (Ghazipur) स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय इन दिनों अव्यवस्थाओं के चलते चर्चा में है। यहां आने वाले मरीजों को इलाज से ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति ऐसी हो गई है कि सुविधाओं की कमी और लापरवाही के कारण मरीजों को मजबूरी में दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह अस्पताल क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए एकमात्र सहारा है, लेकिन यहां की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
डॉक्टरों और स्टाफ की कमी:
अस्पताल में डॉक्टरों और फार्मासिस्ट की भारी कमी बताई जा रही है। इस वजह से मरीजों को समय पर इलाज और सही परामर्श नहीं मिल पा रहा है। कई बार मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, फिर भी उन्हें संतोषजनक इलाज नहीं मिल पाता। स्टाफ की कमी का सीधा असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है, जिससे मरीजों की परेशानियां और बढ़ रही हैं।
दवाओं की आपूर्ति ठप:
सरकारी दवाओं की उपलब्धता लगभग न के बराबर बताई जा रही है। ऐसे में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बाहर की दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति उन लोगों के लिए और कठिन हो जाती है, जो आर्थिक रूप से पहले ही कमजोर हैं। अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
बिजली व्यवस्था पूरी तरह बाधित:
अस्पताल की बिजली व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित है। बिजली जाते ही पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है, क्योंकि न तो इन्वर्टर की सुविधा है और न ही जनरेटर का समुचित इंतजाम। खासकर जच्चा-बच्चा केंद्र में यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है, जहां प्रसव जैसी संवेदनशील सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसी परिस्थितियों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दलालों का सक्रिय नेटवर्क:
अस्पताल परिसर में दलालों की सक्रियता एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। मरीजों के पहुंचते ही कुछ लोग उन्हें घेर लेते हैं और महंगी दवाएं खरीदने तथा अनावश्यक जांच कराने का दबाव बनाते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में कमीशन का एक नेटवर्क काम कर रहा है, जिससे मरीजों को सरकारी सुविधाओं से दूर कर निजी दुकानों और जांच केंद्रों की ओर भेजा जा रहा है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल:
अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कमजोर बताई जा रही है। टूटी हुई दीवारों के कारण आवारा कुत्ते वार्ड तक पहुंच रहे हैं, जो मरीजों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में एंबुलेंस के लिए निर्धारित स्थान पर ठेले और अवैध कब्जे नजर आते हैं, जिससे व्यवस्था और अधिक बिगड़ गई है।
मरीजों का निजी अस्पतालों की ओर रुख:
क्षेत्र की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन लगातार बिगड़ती व्यवस्थाओं के कारण अब लोग जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों का रुख करने लगे हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं और आम लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ता दिख रहा है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल:
इन सभी समस्याओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित अधिकारी इस स्थिति को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर मरीजों की परेशानियां इसी तरह जारी रहेंगी। स्थानीय लोगों को अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार हो सके और मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाए।
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रिपोर्टर: जफ़र इक़बाल