मायावती भतीजी को सौंप सकती हैं पार्टी की कमान:कहा- दोनों भतीजों को पार्टी में कोई पद नहीं दूंगी, परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं
बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने शनिवार को अपनी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनके भाई आनंद कुमार को मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। मायावती के मुताबिक दीपिका की ईमानदारी और कार्यक्षमता के आधार पर भविष्य में उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। फिलहाल दीपिका वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।
मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके दोनों भतीजों आकाश और ईशान को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके बच्चों को भी कोई राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। मायावती ने कांशीराम की विचारधारा का हवाला देते हुए खुद को परिवारवाद के खिलाफ खड़ा बताया।
दीपिका को लेकर मायावती ने क्या कहा:
मायावती ने कहा कि यदि आनंद कुमार को पार्टी के काम में सहयोग के लिए किसी सदस्य की आवश्यकता पड़ती है तो वह अपनी बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। उन्होंने दीपिका की ईमानदारी और कार्यक्षमता को भविष्य में पार्टी में जिम्मेदारी दिए जाने का आधार बताया। दीपिका इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।
मायावती के इस बयान के बाद पार्टी में भविष्य की जिम्मेदारी को लेकर दीपिका आनंद का नाम चर्चा में आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं तो किसी दलित समाज के मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
भतीजों को राजनीतिक पद नहीं देने का ऐलान:
मायावती ने स्पष्ट किया कि उनके दोनों भतीजों आकाश और ईशान को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उनके बच्चों को भी कोई राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। मायावती ने कहा कि कांशीराम की तरह वह भी परिवारवाद के खिलाफ डटी हुई हैं और पार्टी को परिवारवाद से दूर रखना चाहती हैं।
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी में किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता के आधार पर मौका दिया जा सकता है, लेकिन उसकी आड़ में परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इसे पार्टी को परिवारवाद से मुक्त रखने का उद्देश्य बताया।
आकाश के निष्कासन के बाद सामने आया बयान:
मायावती ने दो दिन पहले अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था। वहीं, ईशान अभी 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी बीच मायावती ने परिवार के सदस्यों को पार्टी में राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ईशान को संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर परिवारवाद को लेकर मायावती की आलोचना और ट्रोलिंग हो रही थी। आकाश और ईशान के बीच भी तुलना की जा रही थी। इसके बाद भतीजों को राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं देने का फैसला सामने आया।
महिला नेतृत्व के जरिए दिया जा सकता है संदेश:
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, दीपिका आनंद को आगे बढ़ाने के पीछे महिला नेतृत्व का संदेश भी देखा जा रहा है। मायावती खुद पार्टी की प्रमुख महिला नेता हैं। ऐसे में दीपिका को भविष्य में आगे लाकर यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि उनकी तरह एक महिला भी आगे चलकर पार्टी की कमान संभाल सकती है।
हालांकि, दीपिका के भविष्य की भूमिका को लेकर मायावती ने उनकी ईमानदारी, कार्यक्षमता और जिम्मेदारी संभालने की तैयारी को महत्वपूर्ण बताया है। यदि वह मायावती की उम्मीदों पर खरी उतरती हैं तो भविष्य में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर चर्चा है।
दीपिका तैयार नहीं हुईं तो कार्यकर्ता को जिम्मेदारी:
मायावती ने कहा कि यदि दीपिका पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं तो दलित समाज के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वह महिला नहीं होतीं तो अपने भाई-बहनों को भी अपने साथ नहीं रखतीं।
मायावती के मुताबिक, महिला होने के कारण सुरक्षा और अन्य परेशानियों से बचने तथा सम्मान के साथ पार्टी में काम करने के लिए उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब वह किसी तरह के मोह में नहीं पड़ेंगी और पार्टी को नुकसान नहीं होने देंगी।
2027 चुनाव में जेन-जी को टिकट देने की बात:
मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में जेन-जी को 50 प्रतिशत तक टिकट देने की बात कही। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष दोनों की भागीदारी होगी।
बसपा सरकार नहीं बनने को लेकर कही यह बात:
मायावती ने कहा कि विरोधी दलों के जातिवादी रवैए के कारण बहुजन समाज पार्टी 2012 में पांचवीं बार सरकार नहीं बना सकी। उन्होंने कहा कि इसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को है। मायावती ने यह भी कहा कि बसपा सरकार के बाद प्रदेश में ‘कानून द्वारा कानून का राज’ कायम नहीं हो सका और लोगों का जीवन परेशानियों से भरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि केवल सरकारी ढिंढोरा पीटने से लोगों का पेट नहीं भरता। मायावती ने अपने बयान के जरिए पार्टी की आगामी दिशा, परिवारवाद और चुनावी रणनीति को लेकर अपना रुख सामने रखा।
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