कैसरबाग कोर्ट के 72 चैंबर-स्टॉल ध्वस्त होंगे:हाईकोर्ट का अंतिम अल्टीमेटम, कानून हाथ में लेने पर होगी कार्रवाई

Lucknow (लखनऊ) स्थित Allahabad High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) की खंडपीठ ने Kaiserbagh Civil Court (कैसरबाग सिविल कोर्ट) परिसर के आसपास बने 72 अवैध चैंबरों और नाश्ते-पानी के स्टॉलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि संबंधित कब्जेदार दस दिनों के भीतर स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपने कब्जे का वैध आधार प्रस्तुत नहीं करते, तो उनके निर्माण बिना किसी अतिरिक्त अवसर के ध्वस्त कर दिए जाएंगे। न्यायालय ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

जनहित याचिका पर सुनाया आदेश:

यह आदेश न्यायमूर्ति Rajesh Singh Chauhan (राजेश सिंह चौहान) और न्यायमूर्ति Rajeev Bharti (राजीव भारती) की खंडपीठ ने Anuradha Singh (अनुराधा सिंह) एवं अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने कहा कि संबंधित कब्जेदारों को पहले से जानकारी है कि उनका कब्जा अनधिकृत माना गया है और उसे हटाया जाना है। इसके बावजूद प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए उन्हें अंतिम अवसर प्रदान किया जा रहा है।

नोटिस देने के दिए विस्तृत निर्देश:

खंडपीठ ने Lucknow Nagar Nigam (लखनऊ नगर निगम) को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी 72 कब्जेदारों को दोबारा नोटिस जारी किया जाए। यदि कोई व्यक्ति नोटिस लेने से इनकार करता है, तो संबंधित स्थल पर नोटिस चस्पा किया जाए। साथ ही इसकी सूचना एक हिंदी और एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में भी प्रकाशित कराई जाए। इसके बाद संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने या अतिक्रमण हटाने के लिए 10 दिनों का समय दिया जाए।

समय सीमा के बाद होगी कार्रवाई:

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय समाप्त होने के बाद यदि कोई कब्जेदार न तो स्वयं अतिक्रमण हटाता है और न ही अपने कब्जे के समर्थन में संतोषजनक वैध दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो रविवार के दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। न्यायालय ने कहा कि रविवार को कार्रवाई करने से अदालत के नियमित कार्य में कोई व्यवधान नहीं आएगा। साथ ही ध्वस्तीकरण की तिथि की पूर्व सूचना सभी संबंधित पक्षों को देने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बाधा डालने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई:

Allahabad High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) ने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था बिगाड़ने या सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। न्यायालय ने Police Commissioner (पुलिस आयुक्त), District Magistrate (जिलाधिकारी) और Municipal Commissioner (नगर आयुक्त) को निर्देश दिया कि पूरी कार्रवाई के दौरान आपसी समन्वय बनाए रखें तथा पर्याप्त सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करें।

100 से अधिक अतिक्रमण पहले ही हटाए गए:

सुनवाई के दौरान Lucknow Nagar Nigam (लखनऊ नगर निगम) ने न्यायालय को अवगत कराया कि चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक लगभग 100 अवैध चैंबरों और दुकानों को हटाया जा चुका है। न्यायालय ने इस जानकारी को अभिलेख पर लेते हुए शेष अवैध कब्जों के संबंध में भी समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

अंतिम अवसर के बाद होगी सख्त कार्रवाई:

खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह संबंधित कब्जेदारों को दिया जा रहा अंतिम अवसर है। यदि तय समय के भीतर निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो बिना किसी अतिरिक्त अवसर के नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

Disclaimer:

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