अमेठी: जन्माष्टमी पर सजी कृष्ण-राधा की झांकी, बच्चों का सम्मान
तिलोई-अमेठी में स्थित कम्पोजिट विद्यालय भेलाई कला में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। अवकाश से पहले आयोजित कार्यक्रम में प्राथमिक एवं जूनियर स्तर के 20 बच्चों ने निबंध लेखन में प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। वहीं, प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को सांत्वना पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया।

जन्माष्टमी पर बच्चों ने निबंध प्रतियोगिता में लिया हिस्सा:
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भाद्रपद की अष्टमी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अवकाश रहता है। इस दिन शहरों और गांवों में भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। इसी परंपरा के तहत कम्पोजिट विद्यालय भेलाई कला, तिलोई-अमेठी में भी जन्माष्टमी से पहले बच्चों के बीच निबंध लेखन प्रतियोगिता कराई गई।
प्रधानाध्यापक धीरेन्द्र प्रताप सिंह और शिक्षिका रजिया बानो ने प्राथमिक एवं जूनियर स्तर के 20 बच्चों से भगवान श्री कृष्ण से संबंधित विषय पर निबंध लिखवाया। प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के आधार पर उपहार देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
शिक्षिकाओं ने सजाई कृष्ण-राधा की झांकी:
विद्यालय में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की दर्शनीय झांकी भी सजाई गई। शिक्षिका शशि कुमारी सिंह, प्राची श्रीवास्तव, सरिता सिंह और सुचित्रा सती ने झांकी को तैयार किया। झांकी के माध्यम से बच्चों को भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथाओं और उनके जीवन प्रसंगों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

विद्यालय में आयोजित गतिविधियों के दौरान बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रसंगों की जानकारी भी दी गई। निबंध प्रतियोगिता और झांकी के माध्यम से बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि और समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।
धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताई कृष्ण की लीलाएं:
कम्पोजिट विद्यालय भेलाई कला के प्रधानाध्यापक धीरेन्द्र प्रताप सिंह, जो प्राथमिक शिक्षक संघ-अमेठी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष भी हैं, ने बच्चों को भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में भाद्रपद की अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का जन्म माता देवकी और पिता वासुदेव के यहां मथुरा की जेल में हुआ था।
उन्होंने बच्चों को बताया कि जब-जब धरती पर राक्षसों का आतंक और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान मानव कल्याण और राक्षसों के उद्धार के लिए अवतार लेते हैं। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बच्चों को उनके जीवन और शिक्षाओं के बारे में जानकारी दी।
बच्चों को सत्य, धर्म और नैतिक संस्कारों का संदेश:
धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने कंस, पूतना, बकासुर और अघासुर जैसे कई राक्षसों का वध किया। इन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बच्चों को सत्य, धर्म, प्रेम और शांति के महत्व को समझाया।

विद्यालय में जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को पौराणिक कथाओं और भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों की जानकारी देना रहा। साथ ही बच्चों को सत्य, धर्म और नैतिक संस्कारों के महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
जन्माष्टमी के माध्यम से संस्कृति से जुड़ाव:
कम्पोजिट विद्यालय भेलाई कला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने निबंध लेखन के साथ भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की झांकी के माध्यम से जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जाना। शिक्षकों ने बच्चों को भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनसे जुड़े पौराणिक प्रसंगों की जानकारी दी।
इस दौरान बच्चों को यह भी बताया गया कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पौराणिक कथाओं को याद करने और सत्य, धर्म तथा नैतिक संस्कारों को स्थापित करने की भावना से जुड़ा है। विद्यालय में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को इसी संदेश से अवगत कराया गया।
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रिपोर्टर: वीरेंद्र सिंह