Iran (ईरान) और क्षेत्रीय संघर्ष के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जंग शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अप्रैल से जून के बीच 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इस दौरान कीमतों में औसतन 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर दुनिया भर में महंगाई पर भी पड़ा। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर की छह प्रमुख तेल कंपनियों ने इसी अवधि में रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है।
तेल कंपनियों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा:
Al Jazeera (अल जजीरा) की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने कुल 81 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग सात लाख करोड़ रुपये के बराबर बताई गई है। यह आंकड़ा भारत के वार्षिक रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर बढ़ती तेल कीमतों का असर आम लोगों पर महंगाई के रूप में देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर बड़ी तेल कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
यमन के पास भारतीय जहाज पर हमला:
संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों के बीच Yemen (यमन) के निकट Red Sea (लाल सागर) में भारतीय ध्वज वाले कारोबारी जहाज MSV Faize Noor-e-Aulia (एमएसवी फैजे नूर-ए-औलिया) पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज डूब गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।
ईरान में विदेश मंत्री पर बढ़ा दबाव:
Iran (ईरान) की राजनीति में भी नए घटनाक्रम सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ सांसद Foreign Minister Abbas Araghchi (विदेश मंत्री अब्बास अराघची) के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे हैं।
सांसदों का आरोप है कि United States (अमेरिका) के साथ बातचीत और संभावित समझौते की प्रक्रिया से देश के हितों को नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से विदेश मंत्री के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ने की चर्चा है।
राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होने का दावा:
Israel Channel 14 (इजराइली चैनल 14) की रिपोर्ट के अनुसार, President Masoud Pezeshkian (राष्ट्रपति मसूद पजशकियान) की भूमिका सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मामलों में सीमित कर दी गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब इन विषयों पर अंतिम राय IRGC (आईआरजीसी) के कमांडर Ahmad Vahidi (अहमद वाहिदी) की मानी जाएगी। हालांकि, यह जानकारी संबंधित रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।
समझौते की उम्मीद से तेल कीमतों में नरमी:
इस बीच United States (अमेरिका) और Iran (ईरान) के बीच संभावित समझौते तथा Hormuz Strait (होर्मुज स्ट्रेट) को लेकर सकारात्मक संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
जानकारी के अनुसार, WTI Crude (डब्ल्यूटीआई क्रूड) की कीमत लगभग 5 प्रतिशत घटकर 76.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं Brent Crude (ब्रेंट क्रूड) भी 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, संभावित समझौते की उम्मीद ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत दिए हैं।
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