गाजीपुर: खाद की किल्लत पर प्रशासन सख्त, 5 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति की संस्तुति
गाजीपुर (Ghazipur) में सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल के कारण किसानों को उर्वरक मिलने में हो रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। किसानों तक खाद पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। वहीं, समितियों का कामकाज प्रभावित होने के मामले में पांच कर्मचारियों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसके अलावा एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और 44 कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है।

22 अक्टूबर से हड़ताल के चलते प्रभावित हुई खाद बिक्री:
जनपद की सहकारी समितियों के सचिव 22 अक्टूबर 2026 से क्रमिक हड़ताल पर हैं। इसके चलते बी-पैक्स समितियों के माध्यम से उर्वरक की बिक्री प्रभावित हो रही थी। किसानों की परेशानी को देखते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों और उपजिलाधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। इसी के तहत स्थानीय लेखपालों की ड्यूटी लगाकर समितियों से उर्वरक वितरण की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त सहकारिता विभाग की अन्य संस्थाओं के माध्यम से भी खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
65 इफको केंद्रों के लिए उर्वरक आवंटित:
जिला प्रशासन के अनुसार, जनपद की सभी तहसीलों में स्थित 65 इफको केंद्रों के लिए 650 मीट्रिक टन डीएपी और 325 मीट्रिक टन एनपीएस का आवंटन किया गया है। इन उर्वरकों को केंद्रों तक भेजने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा सके।
इसके अलावा सहकारिता विभाग की तहसील और जिला स्तरीय संस्थाओं सहित 43 अन्य सहकारी उर्वरक बिक्री केंद्रों के लिए 1,094 मीट्रिक टन डीएपी और 525 मीट्रिक टन एनपीएस आवंटित किया गया है। प्रशासन की ओर से इन वैकल्पिक केंद्रों के माध्यम से भी किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
बफर गोदाम में यूरिया और डीएपी का भंडार:
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, किसानों की मांग को देखते हुए जनपद के बफर गोदाम में 8,763 मीट्रिक टन यूरिया, 4,341 मीट्रिक टन डीएपी और 1,724 मीट्रिक टन एनपीएस उपलब्ध है। खाद की उपलब्धता बनाए रखने और वितरण व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।
प्रशासन का जोर है कि सहकारी समितियों में हड़ताल के बावजूद किसानों को उर्वरक के लिए परेशान न होना पड़े। इसी उद्देश्य से अन्य बिक्री केंद्रों और स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था को सक्रिय किया गया है।
पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्ति की संस्तुति:
जिला प्रशासन के अनुसार, पांच सहकारी समिति कर्मचारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 38 के तहत सेवा समाप्ति की कार्रवाई की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। वहीं, एक कर्मचारी के खिलाफ एस्मा की धारा 4 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
इसके अतिरिक्त 44 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें निर्देश दिया गया है कि यदि 29 अक्टूबर 2026 तक समितियों का कामकाज शुरू नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने और समितियों का संचालन बहाल करने को प्राथमिकता दी है।
26 समितियों में कामकाज फिर शुरू:
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता गाजीपुर के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 तक 26 समितियों के सचिव और प्रभारी हड़ताल से वापस लौटकर कामकाज शुरू कर चुके हैं। इनमें से 22 समितियों के प्रभारियों ने 27 और 28 अक्टूबर को पीओएस मशीन के माध्यम से कुल 68 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया है।
यह स्थिति संकेत देती है कि कुछ समितियों में खाद वितरण की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। हालांकि, शेष समितियों में कामकाज पूरी तरह सामान्य होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
किसानों को राहत देने पर प्रशासन का जोर:
जिला प्रशासन का कहना है कि किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं। एक ओर विभिन्न केंद्रों के लिए खाद का आवंटन और प्रेषण किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हड़ताल के कारण प्रभावित समितियों में कामकाज बहाल कराने के प्रयास जारी हैं।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शेष समितियों में वितरण व्यवस्था कब तक सामान्य होती है और किसानों को खाद के लिए हो रही परेशानी से कितनी राहत मिलती है।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी