आजम खान को जमानत, लेकिन बाहर आना मुश्किल:बेटा जेल से छूटेगा, 2 पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा सस्पेंड
समाजवादी पार्टी (SP) के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को अदालत ने दोनों की 10 साल की सजा को निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर दी। हालांकि, कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, आजम खान की रिहाई को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ दो अन्य मामले लंबित बताए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दी जमानत:
डबल पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों की ओर से दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की गई थी। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सजा निलंबित करने और जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई है। इस अंतर के कारण अदालत का आदेश सजा और दोषसिद्धि के मामले में अलग-अलग प्रभाव रखता है।
आजम खान की रिहाई पर अन्य मामलों का असर:
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बावजूद आजम खान की जेल से रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दो अन्य मामले लंबित हैं। इनमें एक मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से हाल ही में दर्ज किए जाने की बात कही गई है, जबकि दूसरा मामला 10 सितंबर को उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग की ओर से दर्ज किया गया था।
ऐसे में आजम खान की रिहाई इन मामलों में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर भी निर्भर कर सकती है। दी गई जानकारी के मुताबिक, यदि संबंधित मामलों में पुलिस की ओर से वारंट-बी जारी नहीं कराया जाता है, तो उनके जेल से बाहर आने की संभावना बन सकती है। हालांकि, उनकी वास्तविक रिहाई की स्थिति संबंधित अभिलेखों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
निचली अदालत से शुरू हुआ था सजा का मामला:
डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर की सांसद-विधायक अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। 17 नवंबर 2025 को अदालत ने दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद सजा बढ़ाने को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया चली।
दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से पेश वकील ने 5 मई 2026 को रामपुर की अपर अदालत में सजा बढ़ाने के लिए अपील दाखिल की थी। इस पर सुनवाई के बाद 23 मई 2026 को आजम खान की सजा तीन साल बढ़ाकर 10 साल कर दी गई थी। वहीं, अब्दुल्ला आजम की सजा में बढ़ोतरी नहीं की गई थी।
हाईकोर्ट में चुनौती के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला:
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने दोषसिद्धि पर रोक लगाने के साथ सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहाई की मांग की थी। मामले में 15 अक्टूबर को बहस पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने सजा निलंबित करने और जमानत देने का फैसला सुनाया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
क्या है डबल पैन कार्ड मामला?:
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब रामपुर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह कार्रवाई भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत के आधार पर हुई थी। दी गई जानकारी के अनुसार, प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 और 120-बी का उल्लेख किया गया था। वर्ष 2017 में बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने भी इस संबंध में शिकायत की थी।
अलग-अलग जन्मतिथि वाले पैन कार्ड का आरोप:
मामले में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे। एक पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज होने की बात कही गई थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में किया गया।
इसी मामले में निचली अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट से सजा निलंबित होने और जमानत मिलने के बाद दोनों को राहत मिली है। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाए जाने के कारण मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
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