यूपी MLC चुनाव में भाजपा से कहां चूक हुई:सपा ने कैसे छीनीं 2 सीटें; शिक्षकों के चुनाव में ‘शिक्षक गुट’ का सफाया
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी (SP) ने वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों के साथ स्नातक वर्ग की कुछ सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कई सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। नतीजों में शिक्षक गुटों का प्रदर्शन भी चर्चा का विषय रहा, क्योंकि इस बार किसी शिक्षक गुट का प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर सका। वहीं, वाराणसी, आगरा और लखनऊ जैसी सीटों पर मुकाबले ने प्रत्याशी चयन और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
सपा की जीत से राजनीतिक समीकरणों में हलचल:
चुनाव परिणामों में सपा ने वाराणसी शिक्षक, आगरा शिक्षक और वाराणसी तथा लखनऊ की स्नातक सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर भी सपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की। दूसरी ओर, भाजपा ने लखनऊ, मेरठ-सहारनपुर, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की शिक्षक सीटों पर जीत दर्ज की। स्नातक वर्ग में भाजपा ने आगरा और मेरठ-सहारनपुर सीटें अपने नाम कीं।
इन नतीजों के बाद भाजपा के सामने उन सीटों की समीक्षा करने की चुनौती है, जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सपा उन जगहों पर जीत गई, जहां उसे जीत नहीं मिलनी चाहिए थी। वहीं, 30 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाली भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में चुनाव नतीजों और विपक्ष की बढ़त पर चर्चा होने की बात कही गई है।
शिक्षक और स्नातक सीटों पर किसने मारी बाजी?:
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ से भाजपा के उमेश द्विवेदी, मेरठ-सहारनपुर से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद से डॉ. ध्रुव त्रिपाठी ने जीत दर्ज की। वहीं वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी रहे।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ से सपा की कांति सिंह, वाराणसी से आशुतोष सिन्हा और इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मानसिंह यादव ने जीत दर्ज की। दूसरी ओर, आगरा से भाजपा के मानवेंद्र सिंह और मेरठ-सहारनपुर से दिनेश गोयल विजयी रहे।
प्रमुख सीटों पर जीत और हार का अंतर:
चुनाव में कई सीटों पर मुकाबला करीबी रहा, जबकि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का अंतर बड़ा था।
- लखनऊ शिक्षक सीट: भाजपा के उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को 4,808 मतों से हराया।
- मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट: भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने 13,241 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
- बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट: भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने 17,676 मतों से जीत दर्ज की।
- गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट: भाजपा के डॉ. ध्रुव त्रिपाठी ने 307 मतों के मामूली अंतर से जीत हासिल की।
- वाराणसी शिक्षक सीट: सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों से हराया।
- आगरा शिक्षक सीट: सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरि किशोर तिवारी को 4,263 मतों से पराजित किया।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा के डॉ. मानसिंह यादव ने इलाहाबाद-झांसी सीट पर 27,663 मतों के अंतर से जीत हासिल की। लखनऊ में कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश सिंह को 17,127 मतों से हराया। वाराणसी में आशुतोष सिन्हा को 50,529 वोट मिले, जबकि भाजपा के केदारनाथ सिंह को 33,530 वोट मिले। इस तरह वाराणसी स्नातक सीट पर सपा ने 16,999 मतों से जीत दर्ज की।
प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा में समीक्षा की चर्चा:
चुनाव के बाद प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा की रणनीति पर सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आगरा शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल ने पहले भाजपा से टिकट के लिए संपर्क किया था। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद वह सपा में शामिल हो गए और चुनाव जीत गए। भाजपा ने इस सीट पर हरि किशोर तिवारी को प्रत्याशी बनाया था।
वाराणसी में भी भाजपा को शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा सपा के लाल बिहारी यादव से पीछे रहे, जबकि स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह को आशुतोष सिन्हा ने हराया। बताया गया कि केदारनाथ सिंह वर्ष 2020 के चुनाव में भी आशुतोष सिन्हा से हार चुके थे।
लखनऊ स्नातक सीट पर भाजपा ने अवनीश सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया था। इस सीट पर सपा की कांति सिंह ने जीत दर्ज की। इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर भी भाजपा को हार मिली। इन नतीजों के बाद प्रत्याशी चयन और स्थानीय संगठन की भूमिका की समीक्षा किए जाने की चर्चा है।
पांच दशक बाद शिक्षक गुटों को नहीं मिली जीत:
इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू शिक्षक गुटों के प्रत्याशियों का प्रदर्शन रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब पांच दशक से विधान परिषद में प्रभाव रखने वाले शिक्षक गुटों का कोई प्रत्याशी इस बार जीत हासिल नहीं कर सका। शिक्षक गुट के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी के भाजपा में शामिल होने के बाद परिषद में शिक्षक दल के प्रतिनिधित्व में भी कमी आई है। अब शिक्षक दल से राज बहादुर सिंह चंदेल के एकमात्र सदस्य बचे होने की बात कही गई है, जो कानपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे।
चुनाव परिणामों के बाद यह चर्चा भी सामने आई कि शिक्षक मतदाता अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए सत्ता पक्ष या विपक्ष से जुड़े प्रतिनिधियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, मतदाताओं के फैसले के पीछे के कारणों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक आकलन सामने आ सकते हैं।
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर करीबी मुकाबला:
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर सपा ने पहले कमलेश यादव को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन बाद में उनका टिकट बदलकर संजयन त्रिपाठी को दे दिया गया। चुनाव में निर्दलीय राजीव यादव और भाजपा के डॉ. ध्रुव त्रिपाठी के बीच भी मुकाबला चर्चा में रहा। भाजपा के डॉ. ध्रुव त्रिपाठी ने केवल 307 मतों से जीत हासिल की। नतीजों को लेकर यह आकलन सामने आया कि टिकट बदलने के फैसले का सपा के प्रदर्शन पर असर पड़ा हो सकता है। हालांकि, मतदाताओं के रुझान और चुनावी समीकरणों के बारे में किसी एक कारण को निर्णायक मानने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भाजपा के प्रचार और संगठन की भूमिका पर चर्चा:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा, बरेली, वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ की सीटों पर प्रचार किया था। इन क्षेत्रों में भाजपा ने कई सीटें जीतीं, लेकिन वाराणसी की दोनों सीटों और लखनऊ स्नातक सीट पर पार्टी को हार मिली। चुनाव के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी, गुटबाजी और प्रत्याशी चयन जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा हुई।
आकलन यह भी सामने आया कि जिन सीटों पर संगठनात्मक समन्वय मजबूत रहा, वहां भाजपा को सफलता मिली, जबकि कुछ स्थानों पर स्थानीय समीकरण पार्टी के पक्ष में नहीं रहे। इन कारणों की वास्तविक भूमिका का आकलन चुनावी आंकड़ों और संगठन की समीक्षा के आधार पर किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग की व्यवस्था पर भी उठे सवाल:
चुनाव के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर पर्यवेक्षक बदलना पड़ा और आगरा शिक्षक सीट के तीन बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया। इन घटनाओं के बाद निर्वाचन व्यवस्था और चुनाव संचालन को लेकर चर्चा तेज हुई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विपक्ष आने वाले विधानसभा चुनाव तक निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठा सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति मजबूत:
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पांच सीटों में भाजपा ने चार पर जीत हासिल की, जबकि आगरा स्नातक सीट पर सपा ने जीत दर्ज की। मेरठ-सहारनपुर की शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर भाजपा विजयी रही। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर भी भाजपा ने अपना कब्जा बनाए रखा। आगरा में शिक्षक सीट सपा के खाते में गई, जबकि स्नातक सीट भाजपा ने जीती।
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर सपा ने हाजी दानिश अख्तर को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने 17,676 मतों से जीत हासिल की। इस नतीजे ने दिखाया कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में केवल सामाजिक समीकरणों के आधार पर जीत सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
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