बस्ती: पूर्व थानाध्यक्ष आत्महत्या कांड में बड़ा खुलासा, खाकी को ब्लैकमेल करने वाले शातिर हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़!
बस्ती (Basti) जिले में वाल्टरगंज के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप से जुड़े गिरोह की गतिविधियों से जुड़ा था। बस्ती रेंज के डीआईजी संजीव त्यागी (Sanjeev Tyagi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच से सामने आई जानकारी साझा की। पुलिस ने गिरोह की मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और कथित तौर पर कानूनी मदद देने वाले एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी दी है।
सरकारी आवास में मृत मिले थे पूर्व थानाध्यक्ष:
29 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरकारी आवास में तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह फंदे से लटके मिले थे। घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। मामले में मृतक के पुत्र संदीप सिंह की तहरीर पर कोतवाली बस्ती (Kotwali Basti) में मुकदमा दर्ज किया गया।
इसके बाद पुलिस और सर्विलांस टीम ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान कॉल विवरण और अन्य उपलब्ध जानकारी को खंगाला गया। पुलिस के अनुसार, इसी प्रक्रिया में पूर्व थानाध्यक्ष से जुड़े फोन संपर्कों और कथित ब्लैकमेलिंग की परतें सामने आईं।
आत्महत्या से पहले आया था अंतिम फोन:
पुलिस की जांच के मुताबिक, घटना से कुछ घंटे पहले दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर पूर्व थानाध्यक्ष को अंतिम फोन कॉल की गई थी। पुलिस ने बताया कि यह कॉल गिरोह से जुड़े बताए जा रहे अधिवक्ता विजय प्रकाश की थी।
पुलिस के अनुसार, इस बातचीत के दौरान समझौते और रकम को लेकर कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा था। जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर सूर्य प्रकाश सिंह ने आत्मघाती कदम उठाया।
महिला पर प्रेमजाल में फंसाने का आरोप:
बस्ती रेंज के डीआईजी संजीव त्यागी (Sanjeev Tyagi) के मुताबिक, पुलिस जांच में गिरोह के कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से काम करने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने मुख्य आरोपी के रूप में 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी का नाम बताया है।
पुलिस के अनुसार, प्रियंका चौधरी पिछले करीब 10 वर्षों से अपने पति से अलग रह रही थी और मुंबई (Mumbai) में स्पा तथा ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। आरोप है कि वह संपन्न और रसूखदार लोगों को कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाती थी। इसके बाद संबंधों से जुड़े वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किए जाने का आरोप है।
आत्महत्या के नाम पर कथित धमकी:
पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी कथित तौर पर वीडियो कॉल के माध्यम से आत्महत्या का नाटक करती थी। जांच में आरोप सामने आया कि वह अपनी कलाई काटने का वीडियो दिखाकर संबंधित लोगों को झूठे आत्महत्या के मुकदमे में फंसाने की धमकी देती थी।
इसी तरह पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उनके पिता रामनयन और स्थानीय अधिवक्ता विजय प्रकाश के साथ मिलकर कथित तौर पर समझौते और रकम के नाम पर एक करोड़ रुपये की उगाही की डील की जा रही थी।
अन्य लोगों से भी उगाही का दावा:
पुलिस की जांच में गिरोह की गतिविधियों का दायरा बस्ती तक सीमित नहीं होने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मध्य प्रदेश के जबलपुर (Jabalpur) निवासी एक बड़े व्यापारी को भी इसी तरह कलाई काटने का वीडियो भेजकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। पुलिस ने बताया कि इस मामले में कथित तौर पर 15 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी थी।
इसके अलावा पुलिस ने बताया कि गिरोह ने अपने मकान मालिक डॉ. उमेश से कथित तौर पर चार लाख रुपये और उगाही के पैसों से खरीदी गई बोलेरो के चालक अहमद रजा से पांच लाख रुपये ऐंठे थे।
मोबाइल और डिजिटल साक्ष्य बरामद:
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई बोलेरो गाड़ी, तीन मोबाइल फोन, कई कथित आपत्तिजनक वीडियो और आत्महत्या के कथित नाटक से जुड़े डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब इन बरामद सामग्रियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। साथ ही कथित गिरोह के संपर्क में रहे अन्य लोगों और इसके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
अन्य पीड़ितों और लेन-देन की जांच जारी:
डीआईजी बस्ती (Basti) ने बताया कि पुलिस कथित ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के जरिए अर्जित की गई अवैध संपत्ति के संबंध में भी कार्रवाई की प्रक्रिया में है। पुलिस के मुताबिक, ऐसी संपत्ति को बीएनएस की धारा 107 के तहत कुर्क किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
मामले में मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन और अधिवक्ता विजय प्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब कथित गिरोह के संपर्क में आए अन्य पीड़ितों और पूरे वित्तीय लेन-देन की गहनता से जांच कर रही है। सामने आए आरोप जांच का विषय हैं और मामले की अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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