छोटे भाई अबान के जनाजे को कंधा देने अतीक का बेटा अली झांसी जेल से प्रयागराज रवाना, पुलिस की कड़ी सुरक्षा
अतीक अहमद के बेटे अली अहमद शनिवार सुबह झांसी जेल से पैरोल पर बाहर आ गए। सुबह करीब 9:30 बजे 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के बीच उन्हें करीब 400 किलोमीटर दूर प्रयागराज ले जाने के लिए रवाना किया गया। अली का चेहरा मीडिया के सामने न आए, इसके लिए जिस पुलिस वैन में उन्हें बैठाया गया, उस पर पर्दे लगाए गए थे। वैन को जेल के मुख्य गेट के बिल्कुल पास लगाया गया, जबकि मीडिया कर्मियों को करीब 100 मीटर दूर रोक दिया गया।
कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज रवाना हुए अली:
अली को झांसी जेल से जिस वैन में रवाना किया गया, उसके आगे और पीछे पुलिस की दो जीपें चल रही हैं। उनके रास्ते में पड़ने वाले सभी थाना क्षेत्रों की स्थानीय पुलिस को अलर्ट किया गया है। जिस थाना क्षेत्र से अली का काफिला गुजरेगा, वहां की पुलिस उसके साथ सुरक्षा व्यवस्था में शामिल रहेगी।
अली को कड़ी सुरक्षा के बीच झांसी से प्रयागराज ले जाया जा रहा है। पुलिस की ओर से रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जेल से बाहर निकलते समय भी मीडिया कर्मियों को निर्धारित दूरी पर ही रोक दिया गया।
उमर भी लखनऊ जेल से आएंगे बाहर:
अली के बाद लखनऊ जेल में बंद अतीक अहमद के सबसे बड़े बेटे उमर के भी पैरोल पर बाहर आने की जानकारी है। उमर को भी अपने छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए पैरोल मिली है। लखनऊ जेल के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अली और उमर को उनके छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए पैरोल दी थी। दोनों को जेल से सीधे प्रयागराज स्थित कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा।
एक घंटे की मुलाकात की मिली अनुमति:
अदालत के आदेश के अनुसार, प्रयागराज पहुंचने के बाद अली और उमर अपने भाई अहजम तथा बुआ परवीन कुरैशी से पुलिस की मौजूदगी में एक घंटे तक मुलाकात कर सकेंगे। इसके बाद दोनों को वापस जेल ले जाया जाएगा।
पैरोल के दौरान दोनों की गतिविधियों को लेकर अदालत ने चार शर्तें भी निर्धारित की हैं। इन शर्तों का पालन करना दोनों के लिए अनिवार्य होगा।
पैरोल पर अदालत ने लगाईं चार शर्तें:
अदालत की पहली शर्त के मुताबिक अली और उमर पैरोल के दौरान मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे। दूसरी शर्त के तहत उन्हें सोशल मीडिया पर किसी तरह की गतिविधि नहीं करनी होगी।
तीसरी शर्त के अनुसार दोनों किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं कर सकेंगे। चौथी शर्त यह है कि वे किसी अन्य कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। अली और उमर को करीब चार साल में पहली बार पैरोल मिलने की जानकारी दी गई है।
शाम तक प्रयागराज पहुंचने का अनुमान:
झांसी और लखनऊ से प्रयागराज पहुंचने में करीब छह से सात घंटे का समय लग सकता है। ऐसे में अबान को शनिवार रात करीब आठ बजे तक सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की बात सामने आई है।
अबान को प्रयागराज में अपने पिता अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाया जाएगा। इसी स्थान पर उसके दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की भी कब्रें मौजूद हैं।
भाई से मिलने जा रहा था अबान:
अबान की गुरुवार सुबह झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मिलने के लिए जा रहा था। उसके साथ क्रेटा कार में चार अन्य दोस्त भी सवार थे।
सुबह करीब 10:30 बजे हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य दोस्त घायल हो गए।
एक ही एंबुलेंस से प्रयागराज पहुंचे शव:
हादसे के बाद अबान और सोनू के शव शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव लाए गए। हटवा गांव में अबान की बुआ का घर है।
दी गई जानकारी के अनुसार, अतीक अहमद का घर टूटने के बाद अबान इसी स्थान पर रहता था। अब भाई की मौत के बाद अली और उमर को पैरोल के तहत उसके जनाजे में शामिल होने की अनुमति मिली है। दोनों को अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों और पुलिस सुरक्षा के बीच कार्यक्रम में शामिल होकर वापस जेल लौटना होगा।
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