उत्तर प्रदेश में महिला PCS अधिकारी ने छोड़ी सरकारी नौकरी, राजनीति के मैदान में उतर सकती हैं अनुपमा राग
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार को कई घटनाक्रम और नेताओं के बयानों को लेकर हलचल तेज रही। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी और पीसीएस (PCS) अधिकारी अनुपमा राग (Anupama Rag) ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वह प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर तैनात थीं। शुक्रवार को वीडियो जारी कर उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उनके राजनीति में आने और सीतापुर की सिधौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं। दूसरी ओर, भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने समान नागरिक संहिता को लेकर समर्थन जताया, जबकि उन्नाव के भाजपा विधायक अनिल सिंह ने अपने जातिगत बयान पर कायम रहने की बात कही। वहीं, सपा के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
पीसीएस अधिकारी अनुपमा राग ने छोड़ी सरकारी नौकरी:
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी अनुपमा राग उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर नौकरी से इस्तीफा देने की जानकारी सार्वजनिक की। उनके इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
माना जा रहा है कि अनुपमा राग सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती हैं। चर्चा है कि वह सीतापुर जिले की सिधौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि, अभी उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
शास्त्रीय संगीत से बॉलीवुड तक बना चुकी हैं पहचान:
अनुपमा राग प्रशासनिक सेवा में आने के साथ-साथ संगीत की दुनिया में भी अपनी पहचान रखती हैं। वह शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित हैं और गायन के साथ गीत लेखन तथा संगीत संयोजन भी करती हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने फिल्म ‘बिन बुलाए बाराती’ के गाने ‘शालू के ठुमके’ से बॉलीवुड में शुरुआत की थी।
वह राहत फतेह अली खान और मीका सिंह जैसे गायकों के साथ भी काम कर चुकी हैं। उनके संगीत क्षेत्र में योगदान के लिए अखिलेश यादव ने उन्हें यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया था। उनकी मां सुशीला सरोज लखनऊ की मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं।
सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की क्यों चर्चा:
अनुपमा राग के सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाओं के पीछे कई राजनीतिक समीकरण बताए जा रहे हैं। सीतापुर जिले की यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उनके पति अनुराग भदौरिया मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले हैं। इसके अलावा सिधौली विधानसभा क्षेत्र लखनऊ की सीमा से सटा हुआ है और मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा भी है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मनीष रावत का टिकट काटकर हरगोविंद भार्गव को उम्मीदवार बनाया था। हरगोविंद भार्गव को करीब 96 हजार वोट मिले थे, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। टिकट कटने से नाराज मनीष रावत ने भाजपा का दामन थाम लिया था और चुनाव में करीब आठ हजार वोटों से जीत हासिल की थी। ऐसे में हरगोविंद भार्गव का टिकट काटकर किसी नए चेहरे को मौका देना समाजवादी पार्टी के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
अनुराग भदौरिया और अनुपमा राग ने की थी लव मैरिज:
अनुराग भदौरिया और अनुपमा राग की मुलाकात दिल्ली में यूपीएससी की कोचिंग के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वर्ष 2006 में उन्होंने प्रेम विवाह किया। दोनों का एक बेटा भी है।
प्रतीक भूषण सिंह ने यूसीसी का किया समर्थन:
पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के विधायक बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने इच्छा जताई है कि जल्द से जल्द पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू की जाए। प्रतीक भूषण सिंह ने कहा कि अमित शाह की बात बिल्कुल सही है और वह भी इसका समर्थन करते हैं।
जातिगत बयान पर कायम भाजपा विधायक अनिल सिंह:
उन्नाव जिले की पुरवा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अनिल सिंह अपने जातिगत बयान को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। बयान पर सवाल उठने के बाद उन्होंने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे।
विधायक अनिल सिंह ने कहा कि किसी भी जाति का व्यक्ति हो, यदि वह भाजपा कार्यकर्ताओं को धमकाने या उनके साथ बदसलूकी करने का प्रयास करेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपने बयान पर कायम रहने की बात दोहराई।
रामगोपाल यादव ने महंगाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना:
इटावा में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने महंगाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने धनतेरस के दिन अपनी खरीदारी का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह हर साल इस अवसर पर चांदी के कुछ सिक्के खरीदते हैं।
रामगोपाल यादव के मुताबिक, इस बार बाजार में पिछले साल की तुलना में कम भीड़ दिखाई दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बाजार में इतनी भीड़ थी कि निकलना मुश्किल हो रहा था, जबकि इस बार वह आसानी से खरीदारी करके बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि बाजार में भीड़ कम होने से महंगाई का असर साफ दिखाई देता है।
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