अखिलेश बोले-SIR के बाद नागरिकता छीनने का खतरा पैदा होगा:पूछा- 1.27 करोड़ हिंदुओं के वोट कैसे गायब हुए, CM को कैसे पता?
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शुक्रवार को मतदाता सूची में नाम काटे जाने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के उस दावे पर सवाल किया, जिसमें कथित तौर पर एक करोड़ 27 लाख हिंदुओं के नाम मतदाता सूची से गायब होने की बात कही गई है। अखिलेश यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री को कैसे पता चला कि मतदाता सूची से गायब हुए नाम हिंदुओं के ही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भाजपा घुसपैठियों के नाम पर लोगों को डराती थी और अब हिंदुओं के वोट कटने की बात कर रही है।
अखिलेश यादव ने आशंका जताई कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं होगा तो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद उसकी नागरिकता पर भी खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा। साथ ही दावा किया कि इस बार उत्तर प्रदेश में भाजपा को जनता की ओर से करारा जवाब मिलेगा और पार्टी की विदाई होगी।
वोटर पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का सुझाव:
मतदाता सूची में पहचान सुनिश्चित करने के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने वोटर पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सभी लोगों के जैविक पहचान संबंधी आंकड़े और आंखों के रेटिना की तस्वीरें उपलब्ध हैं। ऐसे में पहचान की व्यवस्था को मतदाता सूची से जोड़कर मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है। उनके अनुसार, इससे मतदाता सूची से जुड़े विवादों और नामों में गड़बड़ी की आशंका को दूर करने में मदद मिल सकती है।
फॉर्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप:
अखिलेश यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और एसएसआईआर (SSIR) के बाद फॉर्म-7 के माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटवाने की कथित साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पीडीए प्रहरियों ने इस गड़बड़ी को पकड़ा, जिसके बाद फर्जी फॉर्म भरने का सिलसिला रुका।
उन्होंने नंदलाल निषाद का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक ऐसे व्यक्ति के नाम से हस्ताक्षर कराकर फॉर्म-7 भरवाया जा रहा था, जिसे हस्ताक्षर करना तक नहीं आता। अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच कराने और इसमें जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
नंदलाल निषाद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर का आरोप:
समाजवादी पार्टी के अनुसार, सुल्तानपुर (Sultanpur) के निवासी नंदलाल निषाद हस्ताक्षर करना नहीं जानते हैं। पार्टी का आरोप है कि उनके नाम से कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कराकर निर्वाचन आयोग का फॉर्म-7 भरवाया गया था। इस फॉर्म के जरिए करीब 26 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटवाने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।
नंदलाल निषाद को एक लाख रुपये से किया सम्मानित:
समाजवादी पार्टी की ओर से बताया गया कि इस मामले को सामने लाने और कथित गड़बड़ी उजागर करने के लिए नंदलाल निषाद को अखिलेश यादव ने एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। पार्टी ने इसे उनकी बहादुरी से जोड़ते हुए उनकी सराहना की थी।
इस मामले के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और कथित फर्जीवाड़े तथा जाली हस्ताक्षर के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अखिलेश यादव ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। फिलहाल, उनके बयान के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा फिर चर्चा में है।
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