‘टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे’, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को दी बड़ी चेतावनी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की ओर से जो किया जा रहा है, वह गलत है और देश के खिलाफ है। राहुल गांधी ने कहा कि समय आने पर जिम्मेदार लोगों को पकड़ा जाएगा और वे बच नहीं पाएंगे। उन्होंने अपनी पोस्ट में वोट की कथित चोरी को भारत के लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया।
राहुल गांधी ने आयोग पर लगाए आरोप:
राहुल गांधी ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों से साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि जो कुछ किया जा रहा है, वह गलत है। उन्होंने इसे देश के खिलाफ बताते हुए कहा कि समय आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस मामले में इंसाफ जरूर होगा।
अभिषेक मनु सिंघवी ने भी उठाए सवाल:
राहुल गांधी की पोस्ट के कुछ देर बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनाव आयोग को अपने नियंत्रण में रखने का आरोप लगाया। सिंघवी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने साथियों को भी भ्रम में रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग का कोई फैसला अकेले एक व्यक्ति नहीं ले सकता।
अभिषेक मनु सिंघवी ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक मौजूदा समय में संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का रिपोर्ट में जिक्र:
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में बताया गया कि इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के आंकड़ों के नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कुछ मामलों में उनकी जानकारी या सहमति नहीं ली गई। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
फॉर्म-6 में बदलाव पर ओपी रावत की आपत्ति:
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करना गलत और गैरकानूनी है। रावत के मुताबिक यदि इस वैधानिक फॉर्म में बदलाव करना है तो इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
रिपोर्ट में बताया गया कि विवेक जोशी ने मई में फॉर्म-6 में विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित घोषणा जोड़े जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने नियमों में बदलाव किए बिना इस बदलाव को लागू किए जाने पर सवाल उठाया था। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही थी।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर को लेकर भी सवाल:
ओपी रावत ने मतदाता सूची के आंकड़ों और उसके सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जिसमें किसी क्षेत्र के अधिकारी किसी मतदाता सूची में किए गए बदलाव को सही मानते हों, लेकिन सॉफ्टवेयर उन्हें उस बदलाव को दर्ज करने की अनुमति ही न देता हो।
रावत ने कहा कि सभी अधिकारों का केंद्रीकरण किसी एक स्तर पर नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार मतदाता सूची के आंकड़ों के नियंत्रण में बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी संपर्क किया था। रावत ने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
चुनाव आयोग ने मतभेद के आरोपों पर क्या कहा:
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को औपचारिक असहमति के रूप में स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
वहीं ओपी रावत ने कहा कि यदि दो चुनाव आयुक्तों ने किसी फैसले को लेकर लगातार आपत्तियां दर्ज कीं, तो यह गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि दोनों आयुक्तों को कुछ फैसले गलत लग रहे थे तो उन्होंने पहले ही इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
आयोग के दावे और विपक्ष के आरोप आमने-सामने:
पूरे मामले में एक ओर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। मतदाता सूची, फॉर्म-6 और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सामने आए दावों के बीच आयोग और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। इन दावों और आपत्तियों से जुड़े वास्तविक तथ्य संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
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