अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयुक्तों द्वारा पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग का इस तरह काम करना लोकतंत्र के लिए घातक है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग की ओर से हालांकि कहा गया है कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए जाते हैं।
अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को लेकर कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर ही उसके अधिकारियों की आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति से देश के कई राज्यों में बनी सरकारों की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठते हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में नहीं कराया जाना चाहिए।
10 महीने में 14 आपत्तियों का उठाया मुद्दा:
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों को गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से लगातार आपत्तियां दर्ज कराए जाने के बावजूद यदि उन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और अन्य प्रक्रियागत मुद्दों से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों को लेकर आयोग के अन्य अधिकारी भी आपत्ति जता रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मांग रखी कि वर्ष 2027 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव उनकी देखरेख में नहीं कराया जाए।
2022 के विधानसभा चुनाव पर भी आरोप:
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव में पक्षपात हुआ और जिन क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी के समर्थक मतदाता थे, उन्हें चिह्नित कर मतदाता सूची से हटा दिया गया।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने इस संबंध में शपथपत्र के साथ शिकायत भी की थी, लेकिन इसके बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। अखिलेश यादव के मुताबिक, इस तरह की स्थिति से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल पैदा होते हैं।
उपचुनाव को लेकर भी उठाए सवाल:
सपा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव के दौरान भी पार्टी ने ऐसी स्थितियां देखीं, जिनसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। उनका कहना है कि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की शिकायत पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव की ओर से चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उठाए गए इन सवालों के बीच आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा चर्चा में है। वहीं आयोग की ओर से कहा गया है कि अंतिम निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
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