ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एकजुट: शरद पवार की पार्टी ने की सर्वदलीय बैठक की मांग, किस पार्टी ने क्या कहा?
चुनाव आयोग (Election Commission) में कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) की भूमिका और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (Nationalist Congress Party-Sharadchandra Pawar) ने इस मामले में तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला है। वहीं समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party), आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party), वाम दल और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने हालांकि कहा है कि एसआईआर समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
सुप्रिया सुले ने सर्वदलीय बैठक की मांग की:
सुप्रिया सुले ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबर को गंभीर विषय बताते हुए सभी राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था ही कमजोर पड़ने लगे तो देश में भरोसा किस पर किया जाए। सुले के मुताबिक, इस मामले को केवल राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह हर नागरिक के अधिकार से जुड़ा विषय है और अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि सामने आए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जब उनसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने आरोपों की सच्चाई पर खुली चर्चा की आवश्यकता बताई।
दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का मामला:
विवाद उस रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, प्रपत्र-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़े विषयों से था।
विपक्षी नेताओं ने इन कथित आपत्तियों को आयोग के भीतर गंभीर मतभेद का संकेत बताया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि एसआईआर सहित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
अखिलेश यादव ने आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल:
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के भीतर ही अधिकारियों की ओर से बार-बार आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं, तो इससे उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल पैदा होते हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता में बने रहने के लिए किसी संवैधानिक संस्था के साथ छेड़छाड़ क्यों की जा रही है। उनके मुताबिक, पूरे मामले पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है।
अरविंद केजरीवाल ने कार्रवाई की मांग की:
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। केजरीवाल ने पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग भी रखी।
उन्होंने चुनाव आयोग की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं तथा फैसले तीनों मिलकर लेते हैं। उनके मुताबिक, कोई एक व्यक्ति अकेले चुनाव आयोग नहीं चला सकता और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका बैठकों की अध्यक्षता करने की है।
चंद्रशेखर आजाद ने एसआईआर पर जताई चिंता:
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने एसआईआर के जरिए मतदाताओं के मताधिकार को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीर बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़े पैमाने पर वोट काटे जाने की बात सामने आई थी और इसका चुनाव परिणामों पर असर पड़ने की चर्चा हुई।
आजाद ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जिस तरीके से लोगों के मताधिकार और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वह चिंता का विषय है।
वाम दल और तृणमूल कांग्रेस का रुख:
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास (John Brittas) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने संसद से उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग के साथ एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील भी की।
तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन (Derek O’Brien) ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए राज्यसभा में पहले दिए गए प्रस्ताव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की खबर सामने आने के बाद उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का समय आ गया है।
संजय राउत और कांग्रेस नेताओं ने भी उठाए सवाल:
शिवसेना (यूबीटी) (Shiv Sena-UBT) के सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने भी चुनाव आयोग में कथित मतभेदों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए। कांग्रेस (Congress) नेताओं ने भी रिपोर्ट को लेकर आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि पार्टी की ओर से इस मामले पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी जाएगी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने कहा कि यदि रिपोर्ट में बताए गए तथ्य सही हैं तो इससे चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल पैदा होते हैं।
केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए आरोप:
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सामने आई रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके जरिए आम लोगों के वोट काटने की कोशिश की जा रही है।
वेणुगोपाल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है और उनके इस्तीफे या पद से हटाए जाने की मांग की। उन्होंने उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी दी प्रतिक्रिया:
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी (S. Y. Quraishi) ने कहा कि वह शुरुआत से ही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और इसमें अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले वह इस बात को लेकर चिंतित थे कि दोनों चुनाव आयुक्त अपनी आपत्तियां सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं रख रहे हैं, जबकि उन्हें समान अधिकार और मतदान का अधिकार प्राप्त है।
कुरैशी के मुताबिक, अब उन्हें जानकारी मिली है कि दोनों आयुक्त चुपचाप नोट लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कर रहे थे। उन्होंने इसे सकारात्मक बताया और कहा कि इससे उनके प्रति उनका सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि संविधान चुनाव आयोग से निष्पक्ष रहने की अपेक्षा करता है और इसी उद्देश्य से आयोग को बहुसदस्यीय बनाया गया था।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#Tag: #ElectionCommission #GyaneshKumar